इस्लामाबाद। इन दिनों बेहद गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्तान में खाने को भले ही पैसे नहीं हो लेकिन आतंकियों को पाला जा रहा है। हालांकि, इसी आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव, खाली खजाने और भारत के कड़े रुख से परेशान पाकिस्तान अब बातचीत की राह तलाश रहा है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कश्मीर समेत सभी मसलों पर बातचीत की इच्छा जताई है। कहा है कि पाकिस्तान बातचीत से सभी विवादों को हल करना चाहता है।
पाक पीएम इमरान ने यह पत्र मीडिया में आई उस खबर के बाद लिखा है जिसमें कहा गया था कि एससीओ सम्मेलन के दौरान बिश्केक में पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुलाकात से भारत ने इन्कार कर दिया है। बिश्केक में मोदी और इमरान भाग लेने जाएंगे।
शुक्रवार को ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर को पत्र लिखकर सभी मसलों पर बातचीत की इच्छा का इजहार किया और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता जताई।
लोकसभा चुनाव में जीत के बाद मोदी को टेलीफोन पर बधाई देते हुए इमरान ने बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई थी लेकिन मोदी ने जवाब में पहले हिंसा और आतंकवाद को खत्म कर भरोसा कायम करने को जरूरी बताया था। अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में क्षेत्रीय विकास के लिए दोनों देशों के साथ काम करने को जरूरी बताया गया है। इससे दोनों देशों के लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिलेगी। विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत एकमात्र रास्ता बताया गया है।
पुलवामा हमले से बिगड़ी बात
फरवरी में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देश युद्ध के कगार पर पहुंच गए थे। 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना के विमानों ने पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट स्थित आतंकी शिविर पर हमला किया था और सैकड़ों आतंकी मार गिराए थे। अगले दिन पाकिस्तान ने भी जम्मू-कश्मीर में जवाबी हमला करने की कोशिश की लेकिन भारतीय वायुसेना के सतर्क होने की वजह से उसके विमानों को वापस भागना पड़ा था। इस तनाव को खत्म करने और साथ काम करने की इच्छा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 26 मई की टेलीफोन वार्ता में जताई थी।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कश्मीर समेत सभी मसलों पर बातचीत की इच्छा जताई है। कहा है कि पाकिस्तान बातचीत से सभी विवादों को हल करना चाहता है।
पाक पीएम इमरान ने यह पत्र मीडिया में आई उस खबर के बाद लिखा है जिसमें कहा गया था कि एससीओ सम्मेलन के दौरान बिश्केक में पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुलाकात से भारत ने इन्कार कर दिया है। बिश्केक में मोदी और इमरान भाग लेने जाएंगे।
शुक्रवार को ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर को पत्र लिखकर सभी मसलों पर बातचीत की इच्छा का इजहार किया और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता जताई।
लोकसभा चुनाव में जीत के बाद मोदी को टेलीफोन पर बधाई देते हुए इमरान ने बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई थी लेकिन मोदी ने जवाब में पहले हिंसा और आतंकवाद को खत्म कर भरोसा कायम करने को जरूरी बताया था। अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में क्षेत्रीय विकास के लिए दोनों देशों के साथ काम करने को जरूरी बताया गया है। इससे दोनों देशों के लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिलेगी। विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत एकमात्र रास्ता बताया गया है।
पुलवामा हमले से बिगड़ी बात
फरवरी में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देश युद्ध के कगार पर पहुंच गए थे। 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना के विमानों ने पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट स्थित आतंकी शिविर पर हमला किया था और सैकड़ों आतंकी मार गिराए थे। अगले दिन पाकिस्तान ने भी जम्मू-कश्मीर में जवाबी हमला करने की कोशिश की लेकिन भारतीय वायुसेना के सतर्क होने की वजह से उसके विमानों को वापस भागना पड़ा था। इस तनाव को खत्म करने और साथ काम करने की इच्छा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 26 मई की टेलीफोन वार्ता में जताई थी।
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