Breaking News

सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसद आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

 


नई दिल्ली, -सामान्य वर्ग के गरीबों को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसद आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले को एक याचिका के जरिये सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यह याचिका कारोबारी तहसीन पूनावाला ने दायर की है और इस पर इसी हफ्ते सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में संविधान (103वां) संशोधन अधिनियम, 2019 को चुनौती दी गई है। संविधान में इसी संशोधन के जरिये सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण प्रदान किया गया है। इसमें अधिनियम को रद करने की मांग करते हुए कहा गया है कि आरक्षण के लिए पिछड़ेपन को सिर्फ आर्थिक स्थिति के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता।
याचिका के मुताबिक, ‘संवैधानिक संशोधन औपचारिक रूप से उस कानून का उल्लंघन करता है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में इंदिरा साहनी मामले में अपने आदेश से स्थापित किया था।’ इसमें नौ सदस्यीय पीठ के 1992 के फैसले का हवाला दिया गया है जिसे मंडल केस के नाम से भी जाना जाता है। इसमें कहा गया था कि कुल आरक्षण 50 फीसद से अधिक नहीं हो सकता, लेकिन हालिया विधेयक में इसका उल्लंघन किया गया है और यह सीमा 60 फीसद तक पहुंच गई है। याचिका के जरिये संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। इन्हीं अनुच्छेदों के जरिये सरकार को सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने का अधिकार मिला है।

Check Also

मडीखेडा डेम आधारित जलप्रदाय व्यवस्था 28 दिसम्बर तक बाधित रहेगी  

🔊 Listen to this मडीखेडा डेम आधारित जलप्रदाय व्यवस्था 28 दिसम्बर तक बाधित रहेगी   …