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कवयित्री मंशा पाण्डेय द्वारा लिखी कविता राहे जिन्दगी मे सब मिला

राहे जिन्दगी मे सब मिला
जो मिला दिलकश मिला…
कही ठन्डी आग मिली
कही प्यासा समुन्दर मिला
मै खुदको सम्भाल चलता रहा
यहा होश भी बेहोश मिला
राहे जिन्दगी मे सब मिला
जो मिला दिलकश मिला…
सबके हिस्से मे खुशिया मिली
मेरे हिस्से मे उस्तादे गम मिला
फिर भी शिकायत है मुझे
अजी! ये बहुत कम मिला
राहे जिन्दगी मे सब मिला
जो मिला दिलकश मिला…
अन्धेरी रातो मे चमकते सितारो को देखा
कभी पतझड़ कभी बहारो को देखा
जिस उमर को हसीन बताते है लोग
उसमे लुटते हुए हमने हजारो को देखा…
अब करना भी उनसे क्या गिला
राहे जिन्दगी मे सब मिला
जो मिला दिलकश मिला…
एक शख्स की तमन्ना जिन्दगी मे जिन्दगी भर रही
जज्बो मे सिमट कर रह गयी
कुछ बाते कही अनकही
मगर खेल नसीबा का कुछ और मिला
जो मेरा हो ना सका
वो हमनशी भी मुझे एक मिला…
राहे जिन्दगी मे सब मिला
जो मिला दिलकश मिला

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