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जिंदगी भी एक सबक है अब उसको पढ़ना होगा – कवि आशीष शर्मा

अंतर्मन में द्वंद है अब उससे लड़ना होगा,
जिंदगी भी एक सबक है अब उसको पढ़ना होगा।
जिंदगी के हर मोड़ पर, कुछ गम भी है कुछ खुशियां है
कुछ आंसू ला देंगे मेरे, कुछ पर मुझको हंसना होगा।
कुछ दर्द है ऐसे सीनें में जो मुझको सोने नहीं देते है,
कुछ जख्मों की मरम्मत में रातों को जागना होगा।
कुछ बातें हैं बातों का क्या, बातें तो होती रहती है,
बातें मेरी ना चुभ जाए तुम्हें, मुझे खामोश भी रहना होगा।
जीने की चाह नहीं मुझको, मरने का इरादा भी तो नहीं,
जीते जीते इस जीवन में मुझको किस्तों पर मरना होगा।
अंगारे बिखरे मेरे पथ पर, दहक रहे कुछ शोले है,
एक उम्मीद जगा कर फिर मुझको इस आग पर चलना होगा।
जो होना था वह हो ही गया, किस्मत का खेल था वो सारा,
भूल कर सारी बातों को अब मुझे आगे बढ़ना होगा।
अंतर्मन में द्वंद है अब उससे लड़ना होगा,
जिंदगी भी एक सबक है अब उसको पढ़ना होगा।

कवि -आशीष शर्मा कोलारस जिला शिवपुरी

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