Breaking News

सरकार ने शहरों में जमीन अधिग्रहीत की तो अब नहीं मिलेगा कोई मुआवजा

भोपाल – सूबे के शहरों में विकास कार्यों के लिए सरकार द्वारा अधिग्रहीत की जाने वाली जमीनों के एवज में अब सरकार मुआवजा नहीं देगी। इसके बदले जमीन मालिक को विकास अधिकार प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इस प्रमाण पत्र में सरकार जमीन मालिक को फ्लोर एरिया रेशो (FAR) यानी निर्माण योग्य क्षेत्र देगी, जिसका उपयोग वह किसी अन्य जगह पर कर सकता है।
इस संबंध में राज्य सरकार ने हस्तांतरणीय विकास अधिकार नियम का मसौदा जारी किया है। इस नियम पर 30 दिन में आपत्तियां मांगी गई है। इसके बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा। राज्य सरकार मेट्रो व अन्य विकास कार्यों के लिए जमीनों का अधिग्रहण करेगी। नियमों के मुताबिक जमीन मालिक भूमि अधिग्रहण के बदले मिले विकास अधिकार प्रमाण पत्र को किसी अन्य स्थान पर बिल्डर या अन्य व्यक्ति को बेच भी सकता है। राज्य सरकार द्वारा इंदौर, भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए विशेष तौर पर यह नियम लागू किए जा रहे हैं। मेट्रो रूट और स्टेशन के लिए सरकार को जमीन अधिग्रहण करना है। यह नियम सभी नगरीय निकायों में लागू होंगे।
उत्पादन व प्राप्ति क्षेत्र होंगे नोटिफाई
विकास अधिकार प्रमाण-पत्र के उपयोग के लिए राज्य सरकार उत्पादन क्षेत्र और प्राप्ति क्षेत्र नोटिफाई करेगी। उत्पादन क्षेत्र वह होगा, जहां भूमि अधिग्रहण करने के बाद जमीन को मालिक को प्रमाण पत्र दिया गया है। वहीं प्राप्ति क्षेत्र वह होगा, जहां इस विकास अधिकार प्रमाण-पत्र का उपयोग किया जा सकेगा।
10 साल में नहीं बिका तो खत्म होगी वैधता
जमीन के अधिग्रहण के बदले में दिए जाने वाला विकास अधिकार प्रमाण-पत्र सिर्फ 10 साल के लिए वैध होगा। इस अवधि में यदि प्रमाण-पत्र धारक व्यक्ति ने इसका उपयोग नहीं किया या नहीं बेचा तो प्रमाण पत्र अवैध हो जाएगा। राज्य सरकार द्वारा जारी हस्तांतरणीय विकास अधिकार नियम में यह प्रावधान किया गया है।
जानकारों के मुताबिक इस प्रावधान से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यदि भूमि स्वामी ने विकास अधिकार प्रमाण-पत्र का उपयोग समय पर नहीं किया तो जमीन भी जाएगी और पैसा भी नहीं मिलेगा।
जिसके पास दूसरा घर नहीं, उसे सबसे ज्यादा दिक्कत
जमीन अधिग्रहण के एवज में विकास अधिकार प्रमाण पत्र देने से सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना उन लोगों को करना होगा, जिसके पास दूसरी जमीन या घर नहीं है। ऐसे लोगों के लिए विकास अधिकार प्रमाण पत्र बेचने के सिवाय कोई चारा नहीं होगा, लेकिन यह प्रमाण पत्र कब और कैसे बिकेगा, इस पर सरकार का बहुत ज्यादा दखल नहीं होगा। हालांकि जमीन अधिग्रहण से यदि कोई भूमि स्वामी संतुष्ट नहीं है तो वह कोर्ट जा सकता है।
दोगुना से ज्यादा मिलेगा एफएआर
जमीन अधिग्रहण के एवज में भूमि स्वामी को दोगुना से ज्यादा एफएआर का विकास अधिकार प्रमाण-पत्र बनेगा। इसके लिए नियम में एक फॉर्मूला बनाया गया है।
मनोरंजन के लिए भी हो सकती है जमीन अधिग्रहित
नियमों के मुताबिक सरकार अधोसंरचना विकास, परिवहन सहित मनोरंजन के लिए भी जमीन अधिग्रहीत की जा सकेगी।
प्राप्ति क्षेत्र और प्रभाव क्षेत्र में हो सकेगा विकास अधिकार का उपयोग
विकास अधिकार प्रमाण-पत्र का उपयोग राज्य सरकार द्वारा घोषित किए गए प्राप्ति क्षेत्र और प्रभाव क्षेत्र में ही होगा। सामान्य तौर पर प्राप्ति क्षेत्र राज्य सरकार द्वारा उन क्षेत्रों को घोषित किया जाएगा, जहां अपेक्षाकृत कम विकास हुआ होगा, ताकि उस जगह ज्यादा से ज्यादा निर्माण कार्य हो सके। इसके साथ ही मेट्रो रूट के दोनों और 500 मीटर क्षेत्र को प्रभाव क्षेत्र माना जाएगा, ताकि वहां बहुमंजिला इमारतें बन सकें।
अतिरिक्ति निर्माण के लिए पैसा चुकाना होगा
मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट के आसपास अतिरिक्ति निर्माण के लिए लोगों को पैसा चुकाना होगा। इसकी कीमत कलेक्टर गाइडलाइन, भूखंड का क्षेत्रफल और मौजूदा एफएआर के आधार पर तय की जाएगी।
बिल्डिंग परमिशन का कुछ हिस्सा विकास अधिकार प्रमाण-पत्र से खरीदना होगा
नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति प्रभाव क्षेत्र में अतिरिक्त निर्माण की परमिशन मांगता है तो उसे बिल्डिंग परमिशन का कुछ हिस्सा प्रोजेक्ट की क्रियान्वयन एजेंसी और कुछ हिस्सा विकास अधिकार प्रमाण पत्रों से खरीदना होगा।

Check Also

मडीखेडा डेम आधारित जलप्रदाय व्यवस्था 28 दिसम्बर तक बाधित रहेगी  

🔊 Listen to this मडीखेडा डेम आधारित जलप्रदाय व्यवस्था 28 दिसम्बर तक बाधित रहेगी   …