दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली के मुख्यमंत्री के बीच टकराव इन दिनों भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है. इन दोनों पदों पर बैठे व्यक्तियों में टकराव तब और बढ़ गया जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए.
इस मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में साफ किया कि उपराज्यपाल को कैबिनेट की सलाह पर काम करना होगा. कोर्ट ने साथ ही कहा कि उपराज्यपाल अगर कैबिनेट की किसी सलाह पर सहमत नहीं, तो फिर वह कारण बताते हुए इसे राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं.
आपको मध्य प्रदेश में एक ऐसे वाकये के बारे में बताने जा रहा है, जब यहां के राज्यपाल और मुख्यमंत्री में जमकर टकराव हुआ था. बात उस समय की है जब दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
उस दौरान करीब पांच वर्षों तक उनके राज्यपाल से मतभेद रहे. इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले भाई महावीर मध्य प्रदेश के राज्यपाल थे और 1998 से लेकर 2003 तक राजभवन और मुख्यमंत्री के बीच टकराव की स्थिति बनी रही.
दरअसल, उस दौरान विश्वविद्यालयों को लेकर ज्यादा विवाद होता रहता था. यहां तक कि एक बार विवाद इतना बढ़ गया था कि दिग्विजय सरकार ने राज्यपाल के अधिकार कम करने के लिए विधानसभा में कानून तक पारित कर दिया था.
सरकार ने विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की नियुक्ति के अधिकार राजभवन से छीनकर अपने पास ले लिए थे. तब से लेकर कुलपतियों और कुलसचिवों की नियुक्ति एवं तबादले का अधिकार प्रदेश सरकार के पास ही है. अभी भी स्थिति यही है कि कुलपति राजभवन को ज्यादा महत्त्व देते हैं तो वहीं दूसरी ओर कुलसचिव सरकार को महत्त्व देते हैं.
उस दौरान इस मामले को नजदीक से देखने वाली पत्रकार और लेखक शिफाली इस मामले को आज के परिप्रेक्ष्य में जोड़कर कहती हैं कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टकराव होना कोई नई बात नहीं है. वो मिसाल देते हुए कहती हैं यह स्थिति आज भी बनी हुई है. एक ही पार्टी के होने के बावजूद भी मध्य प्रदेश में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच अफसरों को आदेश देने संबंधी निर्णयों में ऐसी स्थिति देखने को मिल जाती है.
जब राज्यपाल का हक छीनने के लिए कानून ले आए थे मुख्यमंत्री!
बात उस समय की है जब दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. उस दौरान करीब पांच वर्षों तक उनके राज्यपाल से मतभेद रहे.
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