*शरद पूर्णिमा पर सोलह कलाओं से युक्त रहेगा चंद्रमा-पँ.अवधेश व्यास*
गुना|आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है जो इस वर्ष 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी|ज्योतिषी मान्यताओं के अनुसार वर्ष में केवल शरद पूर्णिमा पर ही चंद्रमा षोडश यानी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है| विज्ञान के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि मैं चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी अन्य रात्रियों की अपेक्षा बहुत कम होती है जिसके कारण चंद्रमा अन्य दिनों के सापेक्ष अधिक बड़ा और चमकीला दिखता है|
जिले के प्रख्यात कथावाचक पँ.अवधेश व्यास ने बताया कि शास्त्रानुसार पूर्णिमा का व्रत प्रदोष एवं निशीष(अर्धरात्रि) व्यापनी पूर्णमासी के दिन किया जाता है|गौरतलब है कि अन्य रात्रियों की अपेक्षा शरद रात्रि का महत्व सनातन धर्म मैं अधिक बताया गया है इसका प्रमुख कारण है कि जब भगवान कृष्ण का अवतरण हुआ तब शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि मैं ही गोपियों के साथ रास रचाया था व गोपियों के मनोरथ पूर्ण किये थे तो वहीं
पौराणिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा और मां लक्ष्मी के पूजन का विधान है। इस दिन चंद्रमा की किरणों को अमृत के समान माना जाता है, इस दिन चंद्र दर्शन और चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को सुबह खाने से निरोगी काया और स्वास्थय लाभ की प्राप्ति होती है। साथ ही मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात्रि भर भ्रमण करती हैं, इनके पूजन से घर में धन-संपदा का आगमन होता है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन मां लक्ष्मी का आभिर्भाव समुद्र से हुआ था। इसलिए दीपावली के पहले शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी के पूजन के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
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