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आदिवासियों की जमीन पर दबंगों का कब्जा: सरकारी सिस्टम की लापरवाही का एक मामला


भारत में आदिवासी वर्ग के उत्थान के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद आदिवासी समुदाय के लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिवपुरी जिले में आदिवासी परिवारों को दबंगों द्वारा उनकी जमीन पर कब्जा करने की समस्या के चलते कई परिवारों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

हाल ही में, रन्नौद के ग्राम हरीपुर (मुबारकपुर) के निवासी नथन सिंह ने डीएम कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान एक आवेदन में दावा किया कि गांव के दबंगों ने उनकी जमीन, जिसका सर्वे नंबर 447 और रकबा 10.10 बीघा है, पर अवैध कब्जा कर लिया है। उन्होंने गोपाल सिंह दांगी और उनके भाई टिंकू दांगी पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने जबरदस्ती उनकी भूमि पर कब्जा कर लिया है।

जनसुनवाई: अपनों की समस्याएँ, जिम्मेदारों की अनसुनी

नथन सिंह ने बताया कि कई बार उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से अपनी समस्या बताई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शिवपुरी में जनसुनवाई का आयोजन लगातार हो रहा है, लेकिन आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा। कई बार ऐसे लोग जनसुनवाई में आते हैं, जो पहले ही कई बार आवेदन दे चुके हैं, परंतु उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

क्या दबंगों के आगे Nermanth?

यह प्रश्न उठता है कि आखिर क्या कारण है कि प्रशासन इन दबंगों के आगे नतमस्तक हो चुका है? अधिकारी समस्या का समाधान करने में असफल क्यों हो रहे हैं? क्या ये सब सरकार की लचर व्यवस्था का परिणाम है, या फिर स्थानीय नेतृत्व की अक्षमता की वजह से ऐसा हो रहा है?

सरकारी योजनाओं की हकीकत

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आदिवासियों के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जैसे कि मुफ्त राशन, शौचालय निर्माण, और आवासीय योजनाएँ। लेकिन, वास्तविकता यह है कि इन योजनाओं का लाभ आदिवासी समुदाय को मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों में दिक्कतें आ रही हैं, जब उनके हक की जमीन ही दबंगों के कब्जे में हो।

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