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CM योगी का एक और एक्शन, 3 दिन के अंदर सभी मंत्रियों से मांगा संपत्ति का ब्यौरा

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ लखनऊ – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी मंत्रियों को चिट्ठी लिखी है. इसमें सभी मंत्रियों से उनकी संपत्ति का ब्यौरा मांगा गया है. योगी मंत्रिमंडल के मंत्रियों से तीन दिन के अंदर चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा जमा कराने को कहा गया है. गौर हो कि सीएम योगी ने शपथ ग्रहण के चंद दिनों बाद ही सभी अधिकारियों से उनकी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा और जमा किये गए इनकम टैक्स को पंद्रह दिन के अंदर जमा करने का आदेश दिया था .

ट्रिपल तलाक पर चुप रहनेवाले अपराधी जैसे
तीन तलाक की व्यवस्था बरकरार रखने के आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के स्पष्ट रख के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कहा कि देश का राजनीतिक क्षितिज इस मसले को लेकर मौन बना हुआ है. इससे पूरी व्यवस्था कठघरे में खड़ी हो गयी है और ‘अपराधियों’ तथा उनके सहयोगियों के साथ-साथ इस मामले पर खामोश रहने वाले लोग भी इसके दोषी हैं.
मुख्यमंत्री ने तीन तलाक के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा ‘इन दिनों में एक नयी बहस चली आ रही है. कुछ लोग देश की इस ज्वलंत समस्या को लेकर मुंह बंद किये हुए हैं, तो मुझे महाभारत की वह सभा याद आती है, जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, तब द्रौपदी ने उस भरी सभा से एक प्रश्न पूछा था कि आखिर इस पाप का दोषी कौन है.’उन्होंने कहा ‘मुझे लगता है कि देश का राजनीतिक क्षितिज तीन तलाक को लेकर मौन बना हुआ है. सच पूछें तो यह स्थिति पूरी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर देती है. अपराधियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों को और मौन लोगों को भी.’ योगी का यह बयान आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड द्वारा कल तीन तलाक की व्यवस्था में कोई परिवर्तन ना करने के फैसले के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण माना जा सकता है.
देश में एक सिविल कोड बनाने की जरूरत 
योगी ने समान आचार संहिता का भी जिक्र किया और कहा ‘जब हम चंद्रशेखर जी की बातों को पढ़ते हैं. उन्होंने कहा था कि देश में एक सिविल कोड बनाने की जरूरत है. जब हमारे मामले समान हैं, तो शादी ब्याह के कानून भी समान क्यों नहीं हो सकते हैं.’’ उन्होंने कहा ‘कामन सिविल कोड के बारे में उनकी धारणा स्पष्ट थी. उनके लिये अपनी विचारधारा नहीं बल्कि उनके लिये राष्ट्र महत्वपूर्ण था. हमारी राजनीति राष्ट्रीय हितों पर घात प्रतिघात करके नहीं बल्कि राष्ट्र और संविधान के दायरे में होनी चाहिये. जिस दिन हम इस दायरे में रहकर काम शुरू कर देंगे तो ऐसे टकराव की नौबत ही नहीं आएगी और देश में कोई कानून के साथ खिलवाड़ की हिम्मत नहीं कर सकेगा.’

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