पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ बीजिंग-चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत से चीन आशंकित हो उठा है। उसे लग रहा है कि यह चीन के साथ भारत के संबंधों के लिए अनुकूल नहीं है। इससे मजबूत हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब हार्डलाइन एजेंडा पर आगे बढ़ेंगे जो चीन-भारत संबंधों के लिए अच्छा नहीं होगा।


सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में हुई भाजपा की बड़ी जीत का असर भारतीय राजनीति पर भी पड़ेगा। इससे मोदी को 2019 में एक और कार्यकाल मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है। इन दिनों जबकि भारत और चीन संबंध जटिल व संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं, तब मोदी की सत्ता पर पकड़ का मजबूत होना स्थिति को और ज्यादा मुश्किल बना सकता है।
लेख में मोदी का कट्टर विचारों वाले सक्रिय व्यक्ति के रूप में उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि उनके नेतृत्व में भारत की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में बड़ा बदलाव आया है। भारत में हुई नोटबंदी इसका बड़ा उदाहरण है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद बढ़ाना मोदी के एजेंडे में शामिल है। इसके लिए वह अपने पूर्ववर्तियों से अलग हैं और विवाद में पड़ने से भी नहीं बचते। मोदी ने विवादित मामलों को लेकर राय कायम करने की परंपरा शुरू की है और इसके बीच अपने देश का फायदा देखा है।
इस दौरान उन्होंने चीन और रूस के साथ अलग-अलग संबंध बढ़ाए हैं और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भी शामिल हुए हैं। इतना ही नहीं मोदी ने अमेरिका और जापान के साथ रक्षा सहयोग भी बढ़ाया है।
दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका की नीति के करीब भी भारत को ले गए हैं। अगर मोदी 2019 का चुनाव जीतते हैं तो निश्चित रूप से चीन-भारत के संबंधों को लेकर मुश्किल का दौर बना रहेगा लेकिन खुद भारत के लिए यह बेहतर साबित हो सकता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब हार्डलाइन एजेंडा पर आगे बढ़ेंगे जो चीन-भारत संबंधों के लिए अच्छा नहीं होगा।
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