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विश्व उपभोक्ता दिवस : 73% ग्राहक नहीं देखते एक्सपायरी डेट

 मंथन न्यूज़ रिपोर्टर। एक तरफ सरकार उपभोक्ताओं को जागरूक करने पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं,वहीं उपभोक्ता खुद ही अपने अधिकारों से वाकिफ नहीं है। इसका कारण यह होता है कि या तो वह ठगी का शिकार होता है या नुकसान करा बैठता है। उपभोक्ताओं की इन्हीं परेशानियों और लापरवाहियों को ध्यान में रखते हुए इंडियन कंज्यूमर सोसायटी की ओर से हाल ही में एक सर्वे करायाbuying products mp 2017315 15916 15 03 2017
गया। इसके रिजल्ट काफी चौकानें वाले रहे।
रिपोर्ट के अनुसार अगर मेडिकल प्रोडक्ट्स को छोड़ दिया जाए तो करीब 73 फीसदी उपभोक्ता उत्पाद की एक्सपायरी डेट देखे बिना ही खरीदारी कर लेते हैं, वहीं 65 फीसदी उपभोक्ता बिल नहीं लेते। यह सर्वे भोपाल सहित देश के 16 शहरों में किया गया। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं की जागरूकता को परखना था। आज हमने विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर इस रिपोर्ट के माध्यम से ग्राहकों को उनके अधिकार बताने का प्रयास किया है।
नहीं पता कहां करें शिकायत
सर्वे में सामने आया कि लोगों को उपभोक्ता संरक्षण फोरम के बारे में पता तो है, लेकिन 61 फीसदी को यह जानकारी नहीं है कि शिकायत किस तरह की जाए। इसके अलावा ज्यादातर समझते हैं कि फोरम में शिकायत के लिए वकील करना जरूरी होता है। इसमें बड़ा खर्च आता है और समय भी खर्च होता है। इनके चलते वह अपने अधिकारों का हनन होने पर भी शिकायत नहीं करते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं की तादाद करीब 78 प्रतिशत है। जबकि उपभोक्ता फोरम व उपभोक्ता कोर्ट में वकील की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा ग्राहक छोटे लेन-देन में हुई गड़बड़ियों को भी अनदेखा कर देता है। जबकि यह गलत है। अपनी शिकायत तो दर्ज करानी ही चाहिए।
बिल लेना हमारा अधिकार
कई बार उपभोक्ताओं की गलतियों के कारण भी उनका केस कमजोर हो जाता है। उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ वकील अनुराग खासकलम बताते हैं कि अपने केस को प्रूफ करने के लिए डॉक्यूमेंट्स का होना जरूरी है। इसमें बिल, शिकायत को लेकर किए गए पत्राचार, जॉब कार्ड व उत्पाद से संबंधित किसी एक्सपर्ट की रिपोर्ट शामिल होती है। एक्सपर्ट इंजीनियर, डॉक्टर, या अन्य पेशे से जुड़ा हो सकता है। एक्सपर्ट रिपोर्ट के साथ शपथ पत्र भी लें। कई बार उपभोक्ता एक्सपर्ट की रिपोर्ट तो सौंप देते हैं, लेकिन विशेषज्ञ का शपथ पत्र नहीं लगाते हैं, जिससे वह मान्य नहीं होती है। उपभोक्ता को 30 दिनों के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करानी होती है।
उत्पाद से जुड़ी सभी सूचना को पाने का अधिकार
उपभोक्ताओं को अधिकार है कि वह उत्पाद से जुड़ी जानकारी जैसे मूल्य, स्तर, गुणवत्ता, मात्रा व उसके अंदर मिलाए गए पदार्थों की जानकारी हासिल करे।
खरीदारी के वक्त मोलभाव करने का अधिकार
मोलभाव करना उपभोक्ता का अधिकार है। एमआरपी सरकार की ओर से तय रेट नहीं होता है। उपभोक्ता इसे कम करवा सकता है।
अच्छी सेवा व उत्पाद प्राप्त करने का अधिकार
उपभोक्ता का अधिकार है कि वह अच्छी सेवा व उत्पाद हासिल करे। अगर विक्रेता या सेवा प्रदाता इसमें कोताही करता है,तो वह इनके खिलाफ फोरम में शिकायत कर सकता है।
धोखाधड़ी के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार
अगर उपभोक्ता के अधिकार का हनन किया जाता है। उपभोक्ता का शोषण किया जाता है,तो उसे शिकायत करने का अधिकार है।

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