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भोपाल एनकाउंटर : आतंकियों के बैरक से मिले पर्चे- ‘दीपावली पर आ रहे घर’

भोपाल। भोपाल सेंट्रल जेल से सिमी आतंकियों के फरार होने के बाद जेल के अंदर चल रहे सर्चिंग ऑपरेशन में आतंकियों के बैरक से कई पर्चे व एक रजिस्टर मिला है। हिंदी, ऊर्दू के पर्चों पर लिखा है कि दीपावली पर आ रहे हैं घर। इसके अलावा कुछ पर्चों पर नक्शे भी बने हैं।
bhopal jail2 02 11 2016
फिलहाल पर्चों की जांच चल रही है कि जो नक्शा उसमें बनाया गया है, वह कहीं आतंकियों के उस ठिकाने का तो नहीं जहां वे एनकाउंटर के दौरान छिपे थे। इस पर्चे और नक्शे के बाद इस आशंका को भी बल मिल गया कि आतंकी भागने की प्लानिंग लंबे समय से कर रहे थे। बैरक से सूखा गोश्त भी बरामद हुआ है। जेल प्रबंधन ये भी पता कर रहा है कि सूखा गोश्त अंदर कैसे पहुंचाया गया।
नहीं था सर्किल गार्ड
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन रविवार को बी ब्लॉक में सर्किल गार्ड नहीं था, जिसके चलते ब्लॉक की चैकिंग के लिए गए प्रहरियों रमाशंकर यादव और चंदन सिंह को अंदर लॉक करना पड़ा और चाबी उनके पास थी। जिसे हासिल कर आतंकी ताला खोलकर बाहर तक निकल गए थे। यदि सर्किल गार्ड होता तो वो बाहर से लॉक करके रखता, ऐसे में यदि आतंकी वहां तक आ भी जाते तो उससे आगे नहीं जा पाते और मौजूद सर्किल गार्ड उनके भागने की प्रयास की सूचना अन्य अधिकारियों को दे देता।
नए जेल गार्ड से पूछते थे ट्रेनिंग में क्या-क्या सीखे
भर्ती हुए नए जेल गार्ड से आतंकी उनकी ट्रेनिंग के बारे में भी जानकारी लेते थे। वे उनसे यह जानने की कोशिश करते थे कि वे कितनी तेज दौड़ सकते हैं, एक बार में कितने लोगों को पकड़े रख सकते हैं। मालूम हो कि भोपाल सेंट्रल जेल में 70 नए प्रहरियों की भर्ती पिछले दिनों हुई है।
बेटे के नाम पर प्रहरियों को धमकाते थे 
जेल प्रहरी ही नहीं, अफसर तक आतंकियों के बैरक में जाने से कतराते थे। प्रहरियों को धमकाते हुए आतंकी कहते थे, ‘हमें पता है कि तुम्हारा बेटा कहां पढ़ता है। उसके बारे में सोच लेना।’ यही कारण था कि कोई भी उनसे कुछ भी नहीं कहता था और न ही उनके ब्लॉक में सख्ती से तलाशी होती थी।
आतंकियों के पास नहीं थे हथियार: एटीएस चीफ शमी 
एटीएस चीफ संजीव शमी ने एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में फिर कहा है कि मुठभेड़ के दौरान आतंकियों के पास हथियार नहीं थे। इससे पहले 31 अक्टूबर को भी शमी ने यही बात कही थी। एटीएस चीफ और आईजी भोपाल योगेश चौधरी के बयानों में विरोधाभास के बाद सरकार को जवाब देना पड़ा था कि आईजी योगेश चौधरी ने ऑपरेशन लीड किया था, इसलिए उनके बयान ही माने जाएंगे।                                                                                                                                         पूनम पुरोहित 

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