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घर का सुख दुःख घर में हो,ये बाहर बात बताना ना :- अमित प्रेमशंकर

*अंतिम इच्छा*
मिल जाऊँ ग़र माटी में मैं,किंचित शोक मनाना ना!
कोशिश करना जश्न मने,आँखों से अश्क़ बहाना ना!!

मेरे अंत का हाल लिए,यूं माँ के सम्मुख जाना ना!
पिताश्री से कहना!लेकिन,छोड़ अकेला आना ना!!

प्रेम की टहनी टूटने का,वो दर्द नहीं सह पाएंगे!
घर का सूरज अस्त हुआ,वो जीते जी मर जाएंगे!!

फिर मेरे प्रिये से कहना,अपनी माँग सजाए ना!
बुझ गया जीवन का दीपक,घर का दीप बुझाए ना!!

रहना घर में भूखा लेकिन,हाथ कभी फैलाना ना!
घर का सुख दुःख घर में हो,ये बाहर बात बताना ना!!

यही मेरी है अंतिम इच्छा,इसको तू ठुकराना ना!
साथ-साथ सब मिलकर रहना,कोई शो़र मचाना ना!!
कवि:- अमित प्रेमशंकर

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