शिवपुरी। प्रदेश में आम चुनावो ने दस्तक दे दी है। सभी राजनीतिक दलो ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है। शिवपुरी जिले में लोक सभा और विधानसभा के चुनावो की हवा बहने लगी है। भाजपा को शिवपुरी-गुना संसदीय क्षेत्र और पिछोर की विधानसभा सीट मुहं चिढाती है। इन दोनो सीटो पर कांग्रेस के किले को ध्वस्त करना भाजपा को सबसे बडी चुनोती है। शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटो की बात की जाए तो पिछोर पिछले कई विधानसभा चुनावो से भाजपा को झटका दे रही है। मांग उठ रही है कि पिछोर फतह करने के लिए अभी से प्रत्याशी घोषित कर देना चाहिए। आने वाले विधानसभा चुनावो में क्षेत्रीय सांसद सिंधिया को उन्ही के क्षेत्र में घेरने के लिए भाजपा के बडे-बडे चेहरे इस क्षेत्र में दौरे कर रहे है।
इसी क्रम में इस क्षेत्र की हवा के रूख को भांपने के लिए भाजपा के नए प्रदेशध्यक्ष राकेश सिंह ने सांसद सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में दौरा किया। कल शिवपुरी में रोड शो के साथ पत्रकार वार्ता ओर कार्यकर्ताओ के साथ मिटिंग ली। इस मिटिंग में शिवपुरी विधायक और प्रदेश के मंत्री यशोधरार राजे सिंधिया जिला अध्यक्ष सुशील रघुवंशी के सहित कई स्थानीय भाजपा नेता थे।
इस बैठक का शुद्व ऐजेंंडा था पांच में पांच विधानसभा सीटो पर भाजपा का विजयी होना। सभी सीटो पर चर्चा होते हुए बात पिछोर पर आकर अटक गई। कुछ कार्यकर्ताओ का कहना था कि पिछोर का रण जीतने के लिए प्रत्याशी अभी से घोषित होना चाहिए और अभी से तैयारी करनी चाहिए।
इस बैठक मे हुई चर्चाओ की माने तो पिछोर के पहलवान विधायक केपी सिंह को पटकनी देने के लिए पार्टी प्रीतम लोधी को फिर से मैदान में उतार सकती है,लेकिन कई बार लोधी प्रत्याशी केपी सिंह को हारा नही सके। फिर किसी ब्राहम्मण प्रत्याशी को टिकिट देने की संभावना पर विचार किया गया। यह विचार सबसे ज्यादा पंसद किया गया।
अगर सूत्रो की माने प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह इस बैठक से यह निष्कर्ष ले गए कि पिछोर के पहलवान को चित्त करने के लिए किसी पंडित जी को लडाया जा सकता है और इसके लिए सबसे उत्तम भूतपुर्व विधायक नरेन्द्र बिरथरे के अतिरिक्त ओर कोई विकल्प नही है। नरेन्द्र बिरथेर अक्रामक नेता है और केन्द्रीय मंत्री उमा भारती के सबसे नजदीक है।
अगर भााजपा से नरेन्द्र बिरथरे को टिकिट दिया जाता है तो वे अपने सबसे खास जाने वाले नरेन्द्र बिरथरे को विजयी बनाने के लिए रण में कूद सकती है जिससे लोधी वोट बैंक भाजपा का हो सकता है। पिछोर में ब्राहम्मण मतदाताओ की संख्या भी कम नही है। पिछली बार केपी सिंह की जीत अंतर भी 6 हजार के पास था ओर यह आकडा भाजपा के लिए संजीवनी की तरह काम करता है।
राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है नरेन्द्र बिरथरे अभी पोहरी विधानसभा से टिकिट की मांग कर रहे है। लेकिन संभावनाओ को नकारा नही जा सकता है। ओर संभावनाओ को बल दे तो पिछोर के पहलवान का चित्त करने के लिए शिवपुरी वाले पंडित जी (नरेन्द्र बिरथरे)से अच्छा पहलवान भाजपा के पास नही है।
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