भोपाल@अंकित राज पुरोहित की रिपोर्ट…
सरकार ने विधानसभा चुनाव के पांच महीने पहले भू-राजस्व संहिता के 100 साल पुराने नियमों को बदला है। चुनावी फायदे के मद्देनजर जनता को बड़ी राहत दी है। इसके बावजूद सत्तारूढ़ भाजना ने इसे विधानसभा में चर्चा की बजाए शोरगुल के बीच पास कराया। इसका एक कारण राजस्व मंडल के घोटालों से किनारा करना रहा।
भू-राजस्व संहिता विधेयक 2018 में 122 धाराओं को बदला गया है। राजस्व मंडल के अधिकारों को कम किया है। सीमांकन के प्रकरण निपटाने के अधिकार निजी एजेंसी को दे दिए हैं। निजी एजेंसी से सही निराकरण नहीं करती है तो अनुविभागीय अधिकारी से अपील की जा सकती है। फिर भी मामला नहीं सुलझेगा तो सीधे शासन को जाएगा। जबकि, पूर्व में राजस्व मंडल ही निर्णायक था।
विवादों के निपटारों के अधिकार प्रमुख सचिव स्तर पर दे दिए गए हैं। यदि इन नियमों पर चर्चा होती तो कांग्रेस जमीन घोटालों पर प्रहार करती। राजस्व मंडल के तहत सरकारी जमीनों को कौडि़यों के मोल बेचने के प्रकरण सामने आ चुके हैं। इसके बाद से ही राजस्व मंडल को समाप्त करने की कवायद शुरू हुई, जिसमें राजस्व मंडल के अधिकार कम कर दिए।
अभी तक 58 बार संशोधन
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता-1959 में अब तक 58 संशोधन हुए हैं। प्रदेश सरकार ने इस बार भूमि सुधार आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही 122 धाराओं में संशोधन किया है।
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता-1959 में अब तक 58 संशोधन हुए हैं। प्रदेश सरकार ने इस बार भूमि सुधार आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही 122 धाराओं में संशोधन किया है।
ये हुए प्रमुख बदलाव
-डायवर्सन के लिए अनुविभागीय अधिकारी की मंजूरी जरूरी नहीं। ऑनलाइन शुल्क की रसीद ही प्रमाण।
-नामांतरण की प्रति मुफ्त मिलेगी। सीमांकन निजी एजेंसी से होगा। पहले राजस्व मंडल करता था।
-भूमि स्वामी मनमाफिक जमीन रख बाकी का बंटवारा कर सकेगा।
-राजस्व सर्वेक्षण के लिए पूरे जिले को अधिसूचित नहीं करना होगा।
-पटवारी हलके के स्थान पर सेक्टर का नाम होगा।
-रजिस्ट्रार सत्यापन के बाद ही करेंगे रजिस्ट्री। नामांतरण प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी।
-कृषि भूमि के कुछ हिस्सों को अन्य कार्य में डायवर्सन होने पर अलग-अलग भूखंड दर्शाए जाएंगे।
-निजी जमीन के अतिक्रमण पर 50 हजार व सरकारी जमीन के अतिक्रमण पर एक लाख जुर्माना।
-डायवर्सन के लिए अनुविभागीय अधिकारी की मंजूरी जरूरी नहीं। ऑनलाइन शुल्क की रसीद ही प्रमाण।
-नामांतरण की प्रति मुफ्त मिलेगी। सीमांकन निजी एजेंसी से होगा। पहले राजस्व मंडल करता था।
-भूमि स्वामी मनमाफिक जमीन रख बाकी का बंटवारा कर सकेगा।
-राजस्व सर्वेक्षण के लिए पूरे जिले को अधिसूचित नहीं करना होगा।
-पटवारी हलके के स्थान पर सेक्टर का नाम होगा।
-रजिस्ट्रार सत्यापन के बाद ही करेंगे रजिस्ट्री। नामांतरण प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी।
-कृषि भूमि के कुछ हिस्सों को अन्य कार्य में डायवर्सन होने पर अलग-अलग भूखंड दर्शाए जाएंगे।
-निजी जमीन के अतिक्रमण पर 50 हजार व सरकारी जमीन के अतिक्रमण पर एक लाख जुर्माना।
बदलाव से जनता को लाभ होगा। कई नियम बहुत पुराने और अव्यवहारिक थे। इनसे आमजन को असुविधा होती थी, इसीलिए भू-राजस्व संहिता में संशोधन किया गया है। अब जनता को प्रमाण पत्रों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
-उमाशंकर गुप्ता, राजस्व मंत्री
-उमाशंकर गुप्ता, राजस्व मंत्री
सरकार को १५ साल बाद इन नियमों में संशोधन करने की याद आई। यह संशोधन पहले ही होने थे, लेकिन पहले तो जमीनों की बंदरबांट की गई। नियम बदले हैं तो भू-माफिया पर अंकुश भी होना चाहिए।
-गोविंद सिंह, कांग्रेस विधायक
-गोविंद सिंह, कांग्रेस विधायक
भू-राजस्व संहिता में संशोधन समय के हिसाब से होते हैं। जिन नियमों को बदलकर सरल किया वह बेहतर है। अब ऑनलाइन व टेक्नोलॉजी पर जोर देने की जरूरत है। जहां तक बाद सदन में चर्चा की है तो हर विधेयक पर चर्चा होनी चाहिए।
-डॉ. रणधीर वर्मा, सिविल इंजीनियर व जमीन मामलों के विशेषज्ञ
-डॉ. रणधीर वर्मा, सिविल इंजीनियर व जमीन मामलों के विशेषज्ञ
Manthan News Just another WordPress site