। जिले के बदरवास ब्लॉक की सालोन ग्राम पंचायत के चौकवारी आदिवासी बस्ती में इन दिनों पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। यहां के ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे रोज सुबह-सुबह खाली बर्तन लेकर दो किलोमीटर दूर जंगल के बीच खुदाई किए गए एक गड्ढे से दूषित पानी भरकर ला रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर यह गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
बस्ती में लगे पांचों हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े हैं, जो अब हवा फेंकते हैं। कई बार शिकायतें करने के बावजूद न पंचायत ने ध्यान दिया, न पीएचई विभाग ने। यहां तक कि बस्ती में रहने वाले पूर्व जनपद सदस्य अमरसिंह पटेलिया और सगन पटेलिया जैसे जनप्रतिनिधि भी खुद पानी ढोते हुए नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार अधिकारियों को जानकारी देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
गांव की महिलाएं सुबह से ही पानी लाने के लिए निकल जाती हैं और दिनभर का बड़ा हिस्सा इसी में गुजर जाता है। गर्मी के इस मौसम में, जब तापमान 40 डिग्री के पार है, ऐसे में जंगल से होकर दो किलोमीटर का सफर तय करना बेहद जोखिम भरा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस गड्ढे से पानी भरकर लाया जा रहा है, वह पूरी तरह दूषित है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
इस मामले को लेकर जब पीएचई के सब इंजीनियर आनंद शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “यह मामला आज ही संज्ञान में आया है, कल से ही खराब पड़े सभी हैंडपंपों को दुरुस्त करने का काम शुरू करवा दिया जाएगा।”
चौकवारी बस्ती की यह स्थिति इस बात का बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर करोड़ों रुपये के जल मिशन और विकास योजनाओं के बावजूद ज़मीन पर लोगों को पीने का पानी तक क्यों नहीं मिल पा रहा है?
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