Bhopal :- मध्यप्रदेश के मुखिया कमलनाथ और राज्यपाल (Governor) लालजी टंडन के बीच मतभेदों की खबर आ रही है। जानकारी के अनुसार नए एंग्लो-इंडियन (anglo-indian) सदस्य के नॉमिनेशन के लिए फ़ाइल राज्यपाल के पास भेजी थी। परन्तु राज्यपाल लालजी टंडन ने फ़ाइल पर हस्ताक्षर करने से साफ इंकार कर दिया है। अब इस मुद्दे पर सीएम कमलनाथ और राज्यपाल लालजी टंडन की ठन गई है। अब कमलनाथ सरकार को इससे कितना बड़ा झटका लगा है यह तो आगे पता चेलगा।
ज्ञात हो कि लोकसभा और 14 राज्यों की विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व 25 जनवरी को समाप्त हो गया है। जिसे देखते हुए मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने फाइल को विधानसभा में एंग्लो-इंडियन सुमदाय के सदस्य के नॉमिनेशन के लिए आगे बढ़ाया, लेकिन राज्यपाल लालजी टंडन ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट पहुंचा है मामला
जबलपुर में शैक्षणिक संस्थान चलाने वाली क्रिश्चियन एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष पॉल ने 7 जनवरी को हाइकोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। याचिका में राज्य सरकार और राज्यपाल के कार्यालय पर निष्क्रियता का आरोप लगाया गया। ये तर्क देते हुए कि सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थी। पॉल ने नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अदालत से निर्देश मांगा। साथ ही राज्य सरकार ने अदालत से कहा कि अगर याचिकाकर्ता ने एक नया प्रतिनिधित्व दायर किया है, तो ये बिना देर किए तय किया जाएगा।
न्यायाधीश सुबोध अभ्यंकर ने 9 जनवरी को याचिका पर संज्ञान लिया, याचिकाकर्ता को एक नया प्रतिनिधित्व दाखिल करने का निर्देश दिया और राज्य सरकार और राज्यपाल को 20 जनवरी को या उससे पहले अंतिम फैसला लेने के लिए कहा। हालांकि राज्यपाल टंडन ने कहा कि इस नामांकन का कोई औचित्य नहीं है। 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य में एंग्लो-इंडियंस नहीं हैं। समुदाय का प्रतिनिधित्व 25 जनवरी को समाप्त हो गया है और केंद्र ने तारीख नहीं बढ़ाई है। जिसके कारण इस पर मंजूरी नहीं दी सकती है।
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