एमपी का सियासी संकट दिलचस्प बन गया है और बड़ा सवाल यह है कि- आखिर बहुमत किसके पास है? जहां, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ खड़े डेढ़ दर्जन से ज्यादा विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है, जिसके कारण कमलनाथ सरकार पर सियासी संकट के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं कमलनाथ समर्थक अभी भी दावा कर रहे हैं कि बहुमत उनके पास है! इस सियासी जंग के बीच एमपी के सीएम कमलनाथ का बड़ा बयान आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि हमारे पास पूर्ण बहुमत है, हम विधानसभा में साबित करेंगे?
यही नहीं उनका यह भी कहना है कि एमपी के मौजूदा हालात के लिए बीजेपी जिम्मेदार है और हर बार की तरह इस बार भी बीजेपी को मुंह की खानी पड़ेगी! कमलनाथ के बयान के बाद राजनीतिक पंडित ही नहीं, बीजेपी के दिग्गज भी सियासी गणित में उलझ गए हैं और सारी संभावनाओं को देख रहे हैं कि- क्या और किस तरह से कमलनाथ बहुमत साबित करेंगे? एमपी की कांग्रेस नेता शोभा ओझा के हवाले से खबरें हैं कि- कुल 4 निर्दलीय विधायक हैं, चारों हमारे साथ हैं.
विधायक सभी हमारे साथ हैं. जो सिंधियाजी के साथ गए हैं वे भी हमारे साथ हैं, क्योंकि वे समझ रहे हैं कि एक व्यक्ति की महत्वकांक्षा के चलते उन सबके भविष्य दांव पर हैं! यही नहीं, उन्होंने अपनी सरकार को सुरक्षित बताते हुए कहा कि- हमारे पास गिनती है जो हम विधानसभा के पटल पर साबित कर देंगे, नंबर की कोई कमी नहीं है.
बंगलूरू वाले विधायक हमारे साथ हैं, वे कांग्रेस के साथ हैं. विधानसभा में हम अपना बहुमत सिद्ध करेंगे. भाजपा के विधायक भी हमारे संपर्क में हैं? मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में बनी कांग्रेस सरकार पूरी तरह से एकजुट और सुरक्षित है! उधर, मध्यप्रदेश कांग्रेस का कहना है कि- पूरी कांग्रेस एक है. बीजेपी की “फूट डालो और राज करो” की साजिश कभी कामयाब नहीं होगी.
हमारे सभी विधायक प्रदेश की जनता के प्रति जवाबदारी, अपना फर्ज और नैतिकता समझते हैं. बहरहाल, कांग्रेस और बीजेपी, दोनों पार्टियां अपने-अपने विधायकों की सुरक्षा में लगी हैं, अब तो शक्ति परीक्षण के दिन ही पता चल पाएगा कि कौन सियासी गणित की परीक्षा में पास होता है और कौन फेल?
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