मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया है। सोमवार को दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देकर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित हो गई। लेकिन सदन शुरू होते ही मंत्री पद के लिए नेताओं की दावेदारी फिर से प्रदेश में शुरू हो गई है। निर्दलीय और सहयोगी दलों के विधायक मंत्री पद को लेकर दावेदारी पेश करने में लगे हैं।
कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने एक बार फिर से मंत्री पद के लिए दावेदारी पेश की है। सुरेंद्र सिंह शेरा ने कहा कि मैं मंत्रियों से ज्यादा काम कर रहा हूं। कमलनाथजी ने मुझे मंत्री बनाने का भरोसा दिया है। विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने कहा कि मैं जल्द ही मंत्री बनूंगा।
निर्दलीय के साथ मध्यप्रदेश में सपा और बसपा भी कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रही है। प्रदेश में बसपा के तीन विधायक है। बसपा विधायक राम बाई भी मंत्री बनने को लेकर दावेदारी पेश कर चुकी है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद भोपाल में बैठक के लिए आईं राम बाई ने कहा था कि बीजेपी की तरफ से मुझे ऑफर मिल रहे हैं। लेकिन हम सभी लोग कमलनाथ के साथ हैं।
ये तो सरकार को साथ दे रहे लोग हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी के भी कई वरिष्ठ नेता मंत्री पद की चाहत लिए हुए बैठे हैं। उनकी चाहत भी है कि कमलनाथ मंत्रिमंडल में हमें जगह मिले। कई बार अपनी भावनाओं को व्यक्त भी कर चुके हैं।
मंत्री बनाएगा कौन
मंत्री पद के लिए कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय मिलाकर करीब आधा दर्जन लोग दावेदारी पेश कर रहे हैं। लेकिन सवाल है कि इन्हें मंत्री बनाएगा कौन। क्योंकि कमलनाथ सरकार की तरफ से इसे लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है। पिछले महीने कमलनाथ राज्यपाल आनंदीबेन से मिलने के लिए पहुंचे थे। उसके बाद लगा कि संभवत: मंत्रिमंडल विस्तार की बात के लिए ही गए होंगे।
कमलनाथ ने कर दिया है साफ
तमाम कयासों पर कमलनाथ ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद विराम लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है। मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होगा। यह राज्यपाल से औपचारिक मुलाकात थी। मैं इसके बारे में नहीं सोचा हूं, सिर्फ मीडिया के लोग सोच रहे हैं।
ये हैं समीकरण
मध्यप्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें हैं। बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरी है। दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस के पास 114, भाजपा के पास 109, बसपा के पास 2, सपा के पास 01 और 4 निर्दलीय विधायक हैं। कमलनाथ सरकार को सपा-बसपा और निर्दलीय विधायकों का साथ मिला हुआ है। वहीं, लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के एक सीट कम हो गए हैं। बीजेपी के एक विधायक सांसद बन गए हैं।
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