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कवियत्री प्रज्ञा शिवहरे द्वारा “दिल की बातें दिल में ही रह गईं” पर लिखी सटीक रचना आप सब भी ज़रूर पढ़े।

दिल की बातें दिल में ही रह गईं ,,,
थे कुछ अरमां जो आंखे पी गईं ,,,
सपनों की ख्वाहिशें सपनों में ढह गईं ,,,
खुशियां मेरी थम सी गईं ,,,
मेरी चाहत बस चाहत सी रह गईं ,,,
लबों पर लब्जो की ख़ामोशी सी रह गईं ,,,
दिल की बातें दिल में ही रह गईं ,,,
दिल की बाते दिल में ही रह गईं ,,,,
प्रज्ञा शिवहरे

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