ग़ज़ल
जानकर के मुझे ना सताया करो ।
शान अपनी मुझे मत दिखाया करो |
वो सुनाता रहा आपको वाकया |
आप भी बात अपनी बताया करो |
रात भर याद में ओस रोती रही ,
रात में भी कमल को खिलाया करो |
पास बैठो मिरे आप साजन कभी ,
पास अपने मुझे भी बिठाया करो |
मर न जाऊँ सफ़र में मिरे साजना ,
आप यूँ ना मुझे अब रुलाया करो |
रूठ कर तुम अभी तक सताते रहे ,
आप भी अब मुझे तो मनाया करो
कब तलक याद करती रहूँ एक मैं ,
यार तुम भी तो मुझको बुलाया करो |
ख्वाहिशें है मिरी राज़ तेरे सुनूँ ,
राज़ अपने मुझे तुम सुनाया करो |
खो न जाये पथिक राह में देखिये ,
राह में तुम दिया तो जलाया करो |
उर्वशी शर्मा
शिवपुरी मध्यप्रदेश
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