एमपी कि सियासत को मथने वाला ये सवाल तो बना ही हुआ है कि ये सियासत है, साज़िश है या कुछ और…
क्या एक महीने में, एमपी की कानून व्यवस्था वाकई लचर हो गई है? या अपराधियों ने अपने अंदाज़ बदल लिए हैं, कि अब वो किसी खास टारगेट पर काम कर रहे हैं, वरना क्या वजह है कि पांच दिन में तीन हत्याएं वो भी बीजेपी नेताओं की.तो ये हत्याएं साज़िश हैं या वाकई कानून व्यवस्था की बड़ी चूक. ये पड़ताल अभी जारी है, लेकिन इन घटनाओं ने चुनाव के बाद से कुछ खामोश हुई सूबे की सियासत में उबाल ला दिया है. पंद्रह साल सत्ता में रही बीजेपी अर्से बाद, अंगड़ाई लेकर लड़ाई के लिए फिर मैदान में आई है.कांग्रेस पर ये आरोप लगाते हुए कि सत्ता में हुए बदलाव के साइड इफेक्ट्स अब दिखाई देने लगे हैं.उधर मंदसौर मामले का सिरा हाथों में लिए कांग्रेस इन आरोपों से पल्ला झाड़ते हुए बीजेपी को आइना दिखा रही है कि बीजेपी पहले अपने कार्यकर्ताओं को संभाले.
1-17 जनवरी– मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष प्रह्लाद बंधवार की सरे बाजार गोली मारकर हत्या.हत्यारा पेशेवर शूटर. बाद में ये खुलासा हुआ कि वो बीजेपी कार्यकर्ता है.
2-20 जनवरी – बड़वानी में सुबह की सैर पर निकले मंडल अध्यक्ष मनोज ठाकरे की पत्थरों से मारकर हत्या.हत्यारों का अभी सुराग नहीं.
3-21 जनवरी -ग्वालियर, बेलगढा थाना इलाके में मिली बीजेपी कार्यकर्ता की लाश.पांच दिन- तीन हत्याएं.बीजेपी ने पहले सवाल उठाए.फिर मज़बूत संगठन वाली पार्टी जिला मुख्यालयों पर महीने भर की उम्र वाली कमलनाथ सरकार के खिलाफ नारे लगाते सड़क पर आ गयी.2 डिफेंस में आई कांग्रेस सरकार कानून हाथ में लेने वालों को देख लेने का दम भर रही है.लेकिन साथ में सवाल भी उठा रही है कि जिस तरह बीजेपी नेताओं की हत्या में पार्टी के ही लोगों के नाम सामने आए हैं तो ज़िम्मेदारी बीजेपी की भी है कि वो अपने कार्यकर्ताओँ को अनुशासन में रखे.कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते सड़क पर आई बीजेपी की कोशिश सरकार की फंक्शनिंग पर सवाल उठाने की है.बीजेपी सड़कों पर आकर जनता को यही संदेश देने की कोशिश कर रही है.बाकी लगातार एक खास सियासी दल को टारगेट करके सुनाई दे रही वारदातों के साथ एमपी कि सियासत को मथने वाला ये सवाल तो बना ही हुआ है कि ये सियासत है, साज़िश है या कुछ और…
1-17 जनवरी– मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष प्रह्लाद बंधवार की सरे बाजार गोली मारकर हत्या.हत्यारा पेशेवर शूटर. बाद में ये खुलासा हुआ कि वो बीजेपी कार्यकर्ता है.
2-20 जनवरी – बड़वानी में सुबह की सैर पर निकले मंडल अध्यक्ष मनोज ठाकरे की पत्थरों से मारकर हत्या.हत्यारों का अभी सुराग नहीं.
3-21 जनवरी -ग्वालियर, बेलगढा थाना इलाके में मिली बीजेपी कार्यकर्ता की लाश.पांच दिन- तीन हत्याएं.बीजेपी ने पहले सवाल उठाए.फिर मज़बूत संगठन वाली पार्टी जिला मुख्यालयों पर महीने भर की उम्र वाली कमलनाथ सरकार के खिलाफ नारे लगाते सड़क पर आ गयी.2 डिफेंस में आई कांग्रेस सरकार कानून हाथ में लेने वालों को देख लेने का दम भर रही है.लेकिन साथ में सवाल भी उठा रही है कि जिस तरह बीजेपी नेताओं की हत्या में पार्टी के ही लोगों के नाम सामने आए हैं तो ज़िम्मेदारी बीजेपी की भी है कि वो अपने कार्यकर्ताओँ को अनुशासन में रखे.कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते सड़क पर आई बीजेपी की कोशिश सरकार की फंक्शनिंग पर सवाल उठाने की है.बीजेपी सड़कों पर आकर जनता को यही संदेश देने की कोशिश कर रही है.बाकी लगातार एक खास सियासी दल को टारगेट करके सुनाई दे रही वारदातों के साथ एमपी कि सियासत को मथने वाला ये सवाल तो बना ही हुआ है कि ये सियासत है, साज़िश है या कुछ और…
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