मुरैना। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की कांग्रेस से गठबंधन न करने की घोषणा के बाद जिले के उन नेताओं ने राहत की सांस ली है जो कांग्रेस से टिकट के दावेदार थे। जिन सीटों के कांग्रेस के नेता गठबंधन से प्रभावित हो रहे थे, उनमें अंबाह, दिमनी, मुरैना व सुमावली विधानसभा सीटें थी। हालांकि चर्चा जौरा विधानसभा सीट की भी थी।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की कांग्रेस से गठबंधन न करने की घोषणा के बाद जिले के उन नेताओं ने राहत की सांस ली है जो कांग्रेस से टिकट के दावेदार थे। जिन सीटों के कांग्रेस के नेता गठबंधन से प्रभावित हो रहे थे, उनमें अंबाह, दिमनी, मुरैना व सुमावली विधानसभा सीटें थी। हालांकि चर्चा जौरा विधानसभा सीट की भी थी। अब इन सीटों से टिकट का दावा करने वाले नेता काफी प्रशन्ना हैं और उन्होंने टिकट के लिए दोबारा से दमखम से प्रयास करना शुरू कर दिया था।
क्यों जा रही थी ये चारों सीटें गठबंधन में:
दिमनी व अंबाह विधानसभा सीट पर बसपा के विधायक थे। साथ ही मुरैना सुमावली सीट पर बसपा के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर थे और उनकी हार बहुत कम मतों से हुई थी। इसलिए इन दोनों सीटों के भी गठबंधन में बसपा के खाते में जाने की चर्चा चल रही थी। लेकिन अब इन सीटों के कांग्रेस टिकट के दावेदार काफी राहत में हैं।
कमलनाथ की सभा में किया था नेताओं ने गठबंधन का विरोधः
10 सितंबर को कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ की सभा में भी स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने बसपा से गठबंधन करने का विरोध मंच से किया था। उन्होंने कहा था कि हम स्वयं सीट निकालने में सक्षम हैं और गठबंधन की जरूरत नहीं है।
इसलिए कर रहे थे विरोधः
दिमनी, मुरैना व सुमावली में कांग्रेस के वरिष्ठ व पुराने नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। कई नेता तो ऐसे हैं कि इस चुनाव के बाद वे दावेदारी नहीं कर पाते। ऐसे में यदि बसपा से गठबंधन होने पर उनका राजनीतिक कैरियर ही दांव पर लग जाता। इसलिए कांग्रेस नेता गठबंधन का विरोध कर रहे थे। इनमें दिमनी से गिर्राज डंडोतिया, रविंद्र तोमर, अनार सिंह, मधुराज सिंह, ब्रजराज सिंह, मुरैना से रघुराज कंषाना, राकेश मावई, प्रबलप्रताप सिंह मावई, मनोज पाल यादव, सुमावली से एदल सिंह, रामलखन डंडोतिया, मीना सिकरवार, रामकुमार पाराशर आदि का कैरियर प्रभावित हो जाता।
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