MPPSC जांच के घेरे में, जैमर के अनधिकृत उपयोग पर केंद्र ने मांगी रिपोर्ट
पहले पुलिस अधिकारी को आयोग के तत्कालीन सचिव दिनेश जैन ने बैरंग लौटाते हुए परीक्षा में जैमर का इस्तेमाल करने से ही इनकार कर दिया था।
इंदौर। मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीआयोग) की परीक्षा और चयन प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आयोग ने बीते वर्ष सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अनधिकृत रूप से ‘जैमर’ का उपयोग किया था। मामले पर केंद्रीय रक्षा सचिव कार्यालय ने भी आपत्ति ली है। अवर सचिव (सुरक्षा) ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले पर रिपोर्ट मांगी है। एडीजी इंदौर ऑफिस से जांच रिपोर्ट एडीजी इंटेलीजेंस को भेजी गई है। इसमें साफ हुआ है कि संदिग्ध तरीके से आयोग ने कुछ खास परीक्षा कक्षों में अनधिकृत जैमर का उपयोग किया। साथ ही जांच के दौरान पुलिस को भी अधिकारियों ने गलत जानकारी देकर मामले को दबाने की पूरी कोशिश की।
मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा बीते साल जून में आयोजित सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा पहले से ही विवादों में है। इस परीक्षा के विज्ञापन से लेकर परीक्षा आयोजित करवाने के बीच करीब 20 बार संशोधन किए गए। आयु सीमा, अनुभव के अंकों से लेकर चयन प्रक्रिया तक में बदलाव किया गया।
बीते साल चुनाव के ठीक पहले तुरत-फुरत में चयन सूची जारी कर दी गई। बाद में परीक्षा के परिणाम में भी संशोधन हुए। अब इस चयन प्रक्रिया में जैमर के नियमविरुद्ध उपयोग का नया विवाद जुड़ गया है। आयोग अब तक इस बात से इनकार कर रहा था कि उसने परीक्षा में जैमर लगाए थे लेकिन 30 अक्टूबर को सूचना के अधिकार में मिली जानकारी में साफ हो गया कि जैमर के मामले में आयोग की भूमिका संदिग्ध है। आयोग पुलिस और सरकार की जांच एजेंसियों से भी जानकारी छिपा रहा है।
केंद्र की आपत्ति से खुलासा
चयन प्रक्रिया में ‘जैमर’ के मनमाने उपयोग और नियम तोड़ने पर केंद्र के अवर सचिव (सुरक्षा) ने न केवल आपत्ति ली है अपितु कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। परीक्षा के बाद दिल्ली से अवर सचिव (सुरक्षा) अंतर कुमनार ने प्रदेश के मुख्य सचिव को बीते साल अगस्त में पत्र लिखकर पूरी जानकारी मांगी थी। पत्र में साफ लिखा था कि आयोग ने इंडियन वायरलेस टेलीग्राफ एक्ट के साथ केंद्र के दिशा निर्देशों का भी उल्लंघन किया है।
जैमर सिर्फ सरकार द्वारा प्राधिकृत एजेंसियों से ही किराए पर लिए जा सकते हैं। एक्ट के उल्लंघन पर तीन साल तक की सजा का भी प्रावधान है। इसे सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बताते हुए अवर सचिव ने प्रदेश शासन को निर्देश दिए थे कि पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं कि किस फर्म से जैमर लिए और कहां-कहां लगाए गए? दिल्ली से आए पत्र के बाद भोपाल से जांच के आदेश हुए थे।
नहीं दी जानकारी
आयोग द्वारा 2009 में प्रोफेसर भर्ती में गड़बड़ी का खुलासा करने वाली संस्था संवाद क्रांति ने ताजा मामले में आरटीआई दायर की थी। एडीजी ऑफिस से आरटीआई में मिले दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि आयोग ने पुलिस को जांच में सहयोग नहीं किया।
पहले पुलिस अधिकारी को आयोग के तत्कालीन सचिव दिनेश जैन ने बैरंग लौटाते हुए परीक्षा में जैमर का इस्तेमाल करने से ही इनकार कर दिया था। संवाद क्रांति के संयोजक पंकज प्रजापति के अनुसार आरटीआई में प्राप्त दस्तावेज से साफ है कि बार-बार पुलिस के दबाव डालने पर आयोग के परीक्षा नियंत्रक डॉ. पीसी यादव ने लिखित में स्वीकार किया कि आयोग ने जैमर का उपयोग किया लेकिन बाकी जानकारी छिपा ली। इसे गोपनीय एमओयू का हिस्सा बताते हुए न तो उनके उपयोग और न ही जैमर उपलब्ध करवाने वाले वेंडर की जानकारी दी।
प्रजापति के अनुसार आयोग के बदलते जवाब और जैमर के अनधिकृत उपयोग से साफ हो रहा है परीक्षा प्रक्रिया संदेहास्पद है। पूरे मामले में साफ है कि या तो किसी को बेजा लाभ देने के लिए अनधिकृत एजेंसी से कानून तोड़कर जैमर लिए गए या सिर्फ कागजों पर जैमर दिखाए गए। उन्हें कहां लगाया गया, कहां नहीं, ये भी आयोग ने छिपा लिया है। पूरी परीक्षा ऑनलाइन थी और महीनेभर तक चली थी। पूरे मामले विस्तार से जांच होनी चाहिए।
हमें नहीं बताना
– मीडिया को और अन्य लोगों को जैमर से क्या मतलब? हम क्या कर रहे हैं, क्या नहीं। इस बारे में किसी को जानकारी नहीं देंगे। – रेणु पंत, सचिव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग
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