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नर्सों की स्ट्राइक पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई:कोर्ट ने सरकार से पूछा…हड़ताल पर बैठी नर्सों पर क्या हुई कार्यवाही, लिखित में दें जवाब

प्रदेश भर में 10 जुलाई से चल रहीं हड़ताल को लेकर आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा कि बीते चार दिनों से प्रदेश भर की हजारों नर्स हड़ताल पर है, जिसके चलते स्वास्थ्य व्यवस्था ठप्प हो रही है, इसको लेकर आपके द्वारा क्या कार्यवाही की गई है। हाईकोर्ट ने नर्सों की हड़ताल से संबंधित कार्रवाही की रिपोर्ट सोमवार को सरकार के द्वारा पेश करने के निर्देश दिए है।

चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच ने नर्सों की हड़ताल को लेकर सरकार से जवाब तलब किया, जिस पर सरकार की और से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नर्सों की हड़ताल अवैध घोषित की जा चुकी है, चूंकि नर्सें हड़ताल पर है, लिहाजा सरकार इन पर कार्रवाही करने की तैयारी कर रही है। सरकार के इस जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट हुए, और कहा कि सिर्फ नाराजगी व्यक्त करने से काम नही चलेगा, आप इस मामले पर तुरंत एक्शन ले, और कार्यवाही की रिपोर्ट सोमवार तक लिखित में पेश करें।

नर्सों की स्ट्राइक पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई:कोर्ट ने सरकार से पूछा…हड़ताल पर बैठी नर्सों पर क्या हुई कार्यवाही, लिखित में दें जवाब

प्रदेश भर में 10 जुलाई से चल रहीं हड़ताल को लेकर आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा कि बीते चार दिनों से प्रदेश भर की हजारों नर्स हड़ताल पर है, जिसके चलते स्वास्थ्य व्यवस्था ठप्प हो रही है, इसको लेकर आपके द्वारा क्या कार्यवाही की गई है। हाईकोर्ट ने नर्सों की हड़ताल से संबंधित कार्रवाही की रिपोर्ट सोमवार को सरकार के द्वारा पेश करने के निर्देश दिए है।

 

चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच ने नर्सों की हड़ताल को लेकर सरकार से जवाब तलब किया, जिस पर सरकार की और से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नर्सों की हड़ताल अवैध घोषित की जा चुकी है, चूंकि नर्सें हड़ताल पर है, लिहाजा सरकार इन पर कार्रवाही करने की तैयारी कर रही है। सरकार के इस जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट हुए, और कहा कि सिर्फ नाराजगी व्यक्त करने से काम नही चलेगा, आप इस मामले पर तुरंत एक्शन ले, और कार्यवाही की रिपोर्ट सोमवार तक लिखित में पेश करें।

हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कि स्ट्राइक अवैध होने के बाद भी बीते चार दिनों से प्रदेश भर की नर्सें हड़ताल पर कैसे बैठी हुई है, इस पर आपने क्या एक्शन लिया, यह जवाब भी लिखित में दे । याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया है कि 2021 में भी हमने नर्सों की हड़ताल को लेकर याचिका दायर की थी जिसे कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से इन्लिग्ल घोषित करते हुए फौरन काम पर वापस आने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने अपनी सुनवाई में यह भी कहा था कि जितने दिनों तक स्ट्राइक चली थी, उतने दिनों का वेतन नही मिलेगा। शुक्रवार को पुनः इस याचिका पर सुनवाई हुई है।

2021 में भी नर्सों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की थी जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया। हाईकोर्ट ने मप्र नर्सेस एसोसिएशन को आदेश दिया थे कि वे काम पर लौटें। नागरिक उपभोक्ता मंच ने नर्सों की हड़ताल को अवैध घोषित करने को लेकर 2021 में जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। याचिका के माध्यम से सवाल उठाया था कि कोविड काल में नर्स और डॉक्टर सहित हेल्थ से जुड़े लोग हड़ताल नहीं कर सकते हैं। राज्य सरकार ने भी 28 जून 2021 को हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया था। बावजूद 30 जून से नर्सों की हड़ताल जारी है। 5 जुलाई 2021 को हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने मामले में सुनवाई करते हुए नर्सों की प्रदेश व्यापी हड़ताल को अवैधानिक बताते हुए तुरंत काम पर लौटने के आदेश दिए थे।

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