March 2, 2025 at 10:09 am
आदिवासी बस्तियों में टीबी के मरीजों की संख्या में वृद्धि, 500 चिह्नित
हाल ही में एक कार्यशाला में बताया गया कि जिले की आदिवासी बस्तियों में तपेदिक (टीबी) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे आदिवासी समुदाय की इम्युनिटी पावर का कम होना एक महत्वपूर्ण कारण है। धूल, मिट्टी और एलर्जी के संपर्क में आने के कारण कई लोग टीबी से ग्रसित हो जाते हैं।

टीबी प्रोग्राम हेड डॉ. अलका त्रिवेदी ने जानकारी दी कि जिले को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 4800 मरीजों का पता लगाना आवश्यक है। फरवरी तक 500 मरीजों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन अब भी 4300 मरीजों की पहचान बाकी है। टीबी संक्रमण विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के निकट के आदिवासी बस्तियों जैसे कठमई, सहलाना, लुधावली और सतनवाड़ा में अधिक देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग इस वर्ष के अंत तक शेष मरीजों की पहचान का प्रयास कर रहा है। टीबी जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें डॉक्टरों ने टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार और नियमित दवाइयां लेने की महत्वता समझाई। टीबी के प्रमुख लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन में कमी, बुखार, बलगम में खून आना और कमजोरी शामिल हैं। यदि किसी को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में बलगम जांच करानी चाहिए।
यह जागरूकता और प्रयास टीबी से निपटने और लोगों को इसके प्रति सचेत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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