फेसबुक वॉल पर लिखा: बेरोजगार भत्ता आलस को पुरस्कृत करने का नकारात्मक उपक्रम
कई लोग ऐसे हैं जिनकी नकद आमदनी होती है और सरकार के पास इनका आकड़ा नहीं है, ये सभी बेरोजगारों की श्रेणी में शामिल होकर भत्ता मांगेंगे। उन्होंने लिखा कि चोरी चकारी, जुआ, नशे, वैश्यावृत्ति, भीख आदि के छोटे-बड़े अपराध में लिप्त अपराधी और भिखारी भी बेरोजगार भत्ता पाने की कोशिश करेंगे।
पालीवाल ने यह भी लिखा है कि लोक लुभावन आयोजनों की मायावी बहार आई है, जिसमें नित नए वादों की बौछार हो रही हैं। पिछले 70 सालों से आरक्षण के लाभ के लिए विभिन्न जातियों में खुद को एक-दूसरे से पिछड़ा साबित करने की होड़ मची हुई है।
इस परिप्रेक्ष्य में हमारे समाज के एक बड़े भाग के लिए यह भी संभव है कि बेरोजगारी भत्ते के लिए भी अच्छे खासे रोजगार करने वाले लोग खुद को बेरोजगार साबित करने की कोशिश करने लगें। काम करने वालों के लिए रोजगार की कमी नहीं है, लोग आलस के कारण मेहनत से जी चुराते हैं। भत्ते मिलने की स्थिति में यह निश्चित है कि रातोंरात भत्ता पाने के लिए बेरोजगार लोगों की एक बड़ी फौज खड़ी हो जाएगी।
आलस को पुरस्कृत करने का उपक्रम
सरकार को आगाह करते हुए उन्होंने लिखा है कि जब तक बेरोजगारी के सही पैमाने तय नहीं हो जाते तब तक हड़बड़ी में बेरोजगारी भत्ते की घोषणा जल्दबाजी में लिया गया एक बेहद प्रतिगामी कदम साबित हो सकता है।
अभी अवैतनिक समाजसेवा करने वाले बहुत से लोग बेरोजगारी भत्ता चाहेंगे। नेताओं और संतों, महंतों, पादरियों और मौलवियों के साथ आवारगी करती भीड़ और गौरक्षा और करणी सेना आदि का बैनर लेकर तोडफ़ोड़ करते लोग बेरोजगारी भत्ता मांगेंगे।
मैं तो कॉमनमैन की तरह हर बात सोचता हूं। जो मन में विचार आते हैं लिख देता हूं। इसका कोई अन्य अर्थ न लगाया जाए।
आरके पालीवाल, प्रधान आयकर आयुक्त, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़
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