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सिंधिया और शिवराज के बीच हुई है 'बार्टर डील' ? 

भोपाल। मध्यप्रदेश के सीएम बनते-बनते रह गए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनते-बनते रह गए शिवराज सिंह चौहान की बीती रात अचानक हुई 45 मिनट की गोपनीय बातचीत के कयासों का दौर शुरू हो गया है। कयास स्वभाविक भी हैं, क्योंकि बंद कमरे में 45 मिनट तक सौजन्य भेंट नहीं होती। एक कयास यह भी लगाया जा रहा है कि सिंधिया और शिवराज के बीच ‘बार्टर डील’ हुई है। इस तरह से दोनों नेताओं ने अपने हित सुरक्षित रखने की कोशिश की है।

दोनों नेताओं की जरूरतें
‘बार्टर डील’ यानी वस्तु या सेवा विनिमय। इसमें दोनों व्यक्तियों के बीच लेन-देन होता है परंतु यह धन के रूप में नहीं होता। संभावना जताई जा रही है कि दोनों नेताओं के बीच ऐसी डील हो सकती है क्योंकि दोनों की स्थिति लगभग एक जैसी ही है। 
शिवराज सिंह नेता प्रतिपक्ष नहीं बन पाए। लोकसभा चुनाव में उनकी नजर विदिशा सीट पर है। वो यहां से साधना सिंह को टिकट दिलाना चाहते हैं परंतु भाजपा में कुछ और ही ताना-बाना बुना जा रहा है। विदिशा भाजपा की सुरक्षित सीट है, इसलिए दावेदारों की फौज तैयार हो रही है और शिवराज सिंह को ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ गुना से चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है। 
ज्योतिरादित्य सिंधिया सीएम नहीं बन पाए। लोकसभा चुनाव में वो ना केवल अपनी सीट से रिकॉर्ड जीत हासिल करना चाहते हैं परंतु मध्यप्रदेश में 20 से ज्यादा सीटों पर जीत दिलाकर खुद को मध्यप्रदेश का हीरो साबित करना चाहते हैं। 
क्या है यह ‘बार्टर डील’
यदि शिवराज सिंह गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में आ गए तो सबसे ज्यादा मुश्किल ज्योतिरादित्य सिंधिया को होगी। देश में भले ही वो एक सांसद हों, प्रदेश में भले ही वो कहते हों कि उन्हे ‘श्रीमंत’ ना पुकारें परंतु गुना-शिवपुरी में तो वो ‘महाराज’ ही हैं। यहां उनकी अपनी प्रतिष्ठा है। चुनाव में बहुत सारी परेशानियां झेलने से अच्छा है ‘रात के अंधेरे में’ एक सौजन्य भेंट कर ली जाए। यहां गौर करने वाली यह भी है कि सिंधिया ने ट्वीटर पर इस मुलाकात का जिक्र किया परंतु शिवराज सिंह ने नहीं किया। जिसकी जरूरत वही आएगा और वही सबको बताएगा। 
इधर शिवराज सिंह चौहान के लिए अब सबसे पहली प्राथमिकता है विदिशा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना। विधानसभा चुनाव में विदिशा से शिवराज सिंह के प्रतिछाया नेता मुकेश टंडन शर्मनाक पराजय प्राप्त कर चुके हैं। इसे विदिशा में शिवराज सिंह की हार कहा गया। कांग्रेस गुटबाजी के हिसाब से विदिशा लोकसभा ज्योतिरादित्य सिंधिया के खाते में आती है। अच्छा अवसर है। सिंधिया इस गढ़ पर कब्जा कर सकते हैं। अत: विदिशा को खतरे में डालने से अच्छा है ‘माफ करो महाराज’ को भूल जाया जाए और दिल खोलकर स्वागत किया जाए। 
and the final deal is “आप मेरे गुना मत आना, मैं आपको विदिशा दूंगा।”

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