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जानिए क्यों 14 साल बाद राष्ट्रीय राजनीति में भेजे गए पूर्व सीएम शिवराज

भोपाल। पिछले 13 साल से प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान का मध्यप्रदेश में दखल कम करने की कोशिश परवान चढ़ने लगी है।
बताया जाता है कि विधानसभा चुनाव में मिली पराजय से नाराज पार्टी शिवराज द्वारा नेता प्रतिपक्ष के चयन में हाईकमान के फैसलों को चुनौती देने से खुश नहीं थी। विधानसभा स्पीकर व डिप्टी स्पीकर चुनाव के फैसले को गलत बताना भी पार्टी को रास नहीं आया। विधायक दल में खुद को आगे करने और नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठने जैसी छोटी-छोटी बातें हाईकमान तक पहुंचाई जा रही थीं। माना जा रहा है कि अब उन्हें किसी अन्य राज्य का प्रभार देकर प्रदेश की राजनीति से रोजमर्रा का होने वाला दखल खत्म कर दिया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ ने जिस तरह शिवराज की तारीफ की उसकी शिकायतें भी दिल्ली तक पहुंचाई गईं। हाल ही में उन्होंने पाला पीड़ित क्षेत्रों में दौरा करने का कार्यक्रम भी बनाया है। वे यह भी चाह रहे थे कि लोकसभा चुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका मध्यप्रदेश में दिखे।
इन सब कारणों के चलते पार्टी ने शिवराज को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय कर दिया। गौरतलब है कि 14 साल पहले वे राष्ट्रीय महामंत्री पद से प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे। तब से वे प्रदेश में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय कार्यसमिति से ठीक पहले हुए इस फैसले का प्रदेश की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

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