मध्य प्रदेश विधानसभा का शीत सत्र नवंबर में ही बुलाया जा सकता है। इसमें 28 नए विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। सत्र का स्वरूप कैसा रहेगा, यह 10 नवंबर को घोषित होने वाले उपचुनाव के परिणाम के आधार पर तय होगा। बताया जा रहा है कि सत्र में नगर पालिका विधि संशोधन के साथ अनुपूरक बजट भी रखा जा सकता है।
हालांकि इसके बारे में अंतिम निर्णय चुनाव के बाद सरकार के स्तर पर होगा। विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर में शीतकालीन सत्र बुलाया जाता है। इसमें वित्त विभाग द्वारा द्वितीय अनुपूरक बजट अनुमान प्रस्तुत किया जाता रहा है, लेकिन यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह इसे लाना चाहती है या नहीं। नए विधायकों को शपथ दिलाने के लिए विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है।
उधर, संसदीय कार्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव परिणामों के आधार पर तय होगा कि सत्र का स्वरूप क्या रहेगा। इसमें शासकीय कार्य भी संपादित किए जा सकते हैं। नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाने के लिए पहले विधानसभा सदस्यता की शपथ दिलाई जाएगी।
यदि कोई और शासकीय काम जरूरी नहीं हुआ तो सत्र एक दिन के लिए भी बुलाया जा सकता है। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि सत्र बुलाने को लेकर निर्णय सरकार को ही लेना है। विधायकों को शपथ अध्यक्ष अपने कक्ष में भी दिलवा सकते हैं और इसके लिए सत्र भी बुलाया जा सकता है।
अध्यादेश के जरिये किया निकाय चुनाव प्रणाली में बदलाव
उधर, वर्ष 2020 में अब तक एक भी सत्र ऐसा नहीं हुआ है, जिसमें लंबी बैठक हुई हो। कोरोना संक्रमण का खतरा और राजनीतिक अस्थिरता के कारण कोई भी सत्र पूरा नहीं हो पाया। सरकार को अध्यादेश के माध्यम से पहले लेखानुदान लाना पड़ा। तीन दिन का सत्र बुलाया गया, लेकिन एक ही दिन में बजट पारित कराया गया।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग इस सत्र में निकाय चुनाव प्रणाली में बदलाव के लिए नगर पालिक विधि संशोधन विधेयक लाने वाला था, लेकिन सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के कारण अध्यादेश के माध्यम से निकाय चुनाव प्रणाली में बदलाव किया गया है। नवंबर-दिसंबर में निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। बताया जा रहा है कि इसके पहले संशोधन विधेयक पारित कराया जा सकता है।
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