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सहरसा से ग्लोबल टेक-लीडर तक का सफर: फेसबुक और टिकटॉक को टक्कर देने वाले कुमार प्रवीण को मिलेगा ‘ग्लोबल रिकॉग्निशन अवार्ड’

जिला स्कूल से बी.टेक और फिर अपने ‘देसी ऐप्स’ से दुनिया को चौंकाने वाले मायटेस्टा टेक्नोलॉजी के सीईओ कुमार प्रवीण ने बढ़ाया बिहार का मान

सहरसा/नई दिल्ली: बिहार के सहरसा जिले (गौतम नगर) के रहने वाले युवा टेक-उद्यमी कुमार प्रवीण की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। श्री मनोज कुमार और श्रीमती महालक्ष्मी देवी के सुपुत्र प्रवीण ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और बिहार का नाम रौशन किया है। ‘मायटेस्टा टेक्नोलॉजी’ (Mytesta Technology) के संस्थापक और सीईओ कुमार प्रवीण को उनके शानदार आईटी और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कार्यों के लिए प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल रिकॉग्निशन अवार्ड’ के लिए नामित किया गया है।

बड़े सपने और देसी इनोवेशन (वोकल फॉर लोकल) प्रवीण की शुरुआती पढ़ाई सहरसा के जिला स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने आगरा के साईं नाथ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक किया। पढ़ाई के बाद उन्होंने एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी शुरू की, लेकिन कुछ बड़ा करने की चाहत उन्हें आगे ले आई। नौकरी छोड़कर उन्होंने अपनी शुरुआती कंपनी बनाई और देश के सैकड़ों शिक्षण संस्थानों के लिए ऑनलाइन एग्जाम सॉफ्टवेयर विकसित किया।

प्रवीण शुरू से ही टेक-इनोवेशन में आगे रहे हैं। जब देश को एक ‘देसी’ सोशल मीडिया की जरूरत थी, तब उन्होंने मार्क जुकरबर्ग से प्रेरणा लेकर ‘फ्लेम डॉट कॉम’ (Flame.com) नामक देसी सोशल नेटवर्किंग साइट का निर्माण किया, जिसमें सोशल नेटवर्किंग के साथ-साथ ऑनलाइन बिज़नेस और मल्टीमीडिया फीचर्स भी थे। यही नहीं, पीएम मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान पर, चाइनीज ऐप टिकटॉक का स्वदेशी विकल्प देते हुए प्रवीण ने ‘लाइव मी’ (Live Me) नाम का एक बेहतरीन शॉर्ट-वीडियो और चैटिंग ऐप भी बनाया, जिसे यूज़र्स द्वारा खूब पसंद किया गया।

मायटेस्टा टेक्नोलॉजी के साथ ग्लोबल उड़ान अपनी पुरानी सफलताओं से निरंतर आगे बढ़ते हुए, आज कुमार प्रवीण ‘मायटेस्टा टेक्नोलॉजी’ का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी कंपनी आज आधुनिक वेब सॉल्यूशंस, कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर और स्केलेबल डिजिटल आर्किटेक्चर बनाने में महारत रखती है। प्रवीण का विज़न बिलकुल स्पष्ट है—उनका मानना है कि “तकनीक केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए होनी चाहिए।”

इनोवेशन और एक्सीलेंस का बेजोड़ संगम प्रवीण की ‘क्लाइंट-फर्स्ट’ अप्रोच और हाई-एंड कोडिंग स्टैंडर्ड्स की वजह से ही आज मायटेस्टा टेक्नोलॉजी ने ग्लोबल स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। ग्लोबल रिकॉग्निशन अवार्ड के लिए उनका नॉमिनेशन उनके इसी विजन और उनकी टीम की कड़ी मेहनत का नतीजा है।

सहरसा के एक छोटे से मोहल्ले से निकल कर, अपने खुद के देसी ऐप्स बनाने और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘ग्लोबल रिकॉग्निशन अवार्ड’ तक पहुँचने का कुमार प्रवीण का यह सफर, पूरे देश के युवा आईटी टैलेंट के लिए एक जीती-जागती मिसाल है।

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