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दिग्विजय सिंह बोले- राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल नहीं चाहता, कांग्रेस के लिए आखिरी सांस तक करूंगा काम

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते, लेकिन कांग्रेस के लिए आखिरी सांस तक काम करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने की मांग उठाते हुए सरकार को चेतावनी दी कि जल्द फैसला नहीं हुआ तो किसानों के साथ आंदोलन किया जाएगा

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट को लेकर चल रही अटकलों पर सफाई दी है। भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह सक्रिय राजनीति से दूर नहीं हो रहे हैं और कांग्रेस पार्टी के लिए जीवन की अंतिम सांस तक काम करते रहेंगे

दिग्विजय सिंह ने बताया कि हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दंपती का वीडियो साझा किया था, जो बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद कार से पूरे देश की यात्रा पर निकल पड़े थे। उन्होंने कहा कि यह वीडियो उन्होंने मजाकिया अंदाज में पोस्ट किया था, लेकिन इसके बाद उनके राजनीति से संन्यास लेने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

 

राज्यसभा के तीसरे कार्यकाल पर दी प्रतिक्रिया

पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उन्होंने पार्टी से केवल इतना कहा है कि वह राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल लेने के इच्छुक नहीं हैं। इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वह कांग्रेस के लिए काम करना बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी जहां भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाने के लिए तैयार रहेंगे और अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व का होगा। राज्यसभा जाने को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने इसे काल्पनिक बताते हुए इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

बासमती चावल को जीआई टैग नहीं मिलने का मुद्दा उठाया

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग नहीं मिलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने तीन महीने पहले केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखकर किसानों की समस्या से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में भी यह मुद्दा उठाया था और सरकार का ध्यान दिलाया था कि जीआई टैग नहीं होने के कारण प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पा रही है

कई जिलों में बड़े पैमाने पर होता है उत्पादन

दिग्विजय सिंह के मुताबिक प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर सहित करीब 14 जिलों में बड़ी संख्या में किसान उच्च गुणवत्ता वाला सुगंधित बासमती चावल उगा रहे हैं। इसके बावजूद जीआई टैग न मिलने के कारण उन्हें अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

2013 में मिला था जीआई टैग

उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था। वर्तमान में पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के बासमती को यह टैग मिला हुआ है, जबकि मध्य प्रदेश के किसान अब भी इससे वंचित हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने जल्द इस विषय पर निर्णय नहीं लिया तो वह प्रदेश के किसानों के साथ मिलकर संसद से लेकर सड़क तक और खेतों से खलिहानों तक व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

 

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