पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली –देश के अगले राष्ट्रपति के चुनाव के लिए तैयारियों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सरकारी महकमे से मिले संकेतों के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए कार्यक्रमों का एलान मई के आखिरी सप्ताह में होगा। वहीं ईवीएम पर गहराए राजनीतिक विवादों के बीच चुनाव आयोग अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने का काम शुरू करेगा। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव के मतदाता होते हैं।
देश के 15वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए लोकसभा के महासचिव अनूप मिश्र को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया जाएगा। जबकि हर राज्य में विधानसभा के सचिव वहां के लिए सहायक रिटर्निंग ऑफिसर बनाए जाएंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग तैयारियों को परखने के बाद मौजूदा राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने के 60 दिन पूर्व चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा करता है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा हो रहा है और नए राष्ट्रपति 25 जुलाई को शपथ ग्रहण करेंगे।
इस लिहाज से माना जा रहा कि 25 मई के बाद चुनाव कार्यक्रमों का एलान कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति पद की दावेदारी में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को भी चुनाव प्रचार का मौका मिलता है और वे राज्यों की राजधानी में जाकर अपने मतदाता सांसद और विधायक से रूबरू होते हैं।
उप्र के विधायक के वोट का मूल्य सबसे ज्यादा
राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों का वोट का मूल्य तो एक समान होता है। जैसा कि पिछले राष्ट्रपति चुनाव में एक सांसद का वोट 708 मत के बराबर था। मगर हर राज्य के विधायक के वोट की कीमत अलग-अलग है।
पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट का मूल्य 208 के बराबर था तो बिहार के एक विधायक का मत का मूल्य 173 था। महाराष्ट्र में 175 तो दिल्ली में एक विधायक के वोट 58 मत के बराबर था। जबकि सिक्किम के एक विधायक का वोट केवल सात मत के बराबर था।
राष्ट्रपति चुनाव में राज्यों की जनसंख्या के हिसाब से उनके विधायकों के मत का मूल्य तय होता है। जाहिर तौर पर सांसदों के बाद देश के सबसे बड़े सूबे के नाते उत्तर प्रदेश के विधायकों के मत का मूल्य सबसे ज्यादा है।
राजग के पक्ष में दिखता आंकड़ा
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो तिहाई बहुमत से मिली कामयाबी ने वस्तुतः राष्ट्रपति चुनाव का आंकड़ा राजग की ओर मोड़ दिया है। उत्तर प्रदेश में विधायकों की संख्या 325 के पार करने की वजह से राजग को अपने उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनाने के लिए महज करीब 25 हजार मत मूल्य के बराबर ही सांसदों और विधायकों की संख्या जुटाने की जरूरत है जो मुश्किल नहीं है।
अभी विपक्षी गठबंधन के खेमे से बाहर के दलों अन्नाद्रमुक, बीजद और टीआरएस के सरकार के साथ सहयोगपूर्ण रवैये को देखते हुए राजग के लिए यह आंकड़ा जुटाना कठिन नहीं दिखता।
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