पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल –भोपाल-उज्जैन पैसेंजर में रखा बम तकनीकी खामी के चलते ठीक से नहीं फटा। यदि बम सही तरीके से फट जाता तो ट्रेन में बैठे यात्रियों के चिथड़े उड़ जाते। वहीं घटना को अंजाम देने के लिए आतंकी मंगलवार सुबह ही दिल्ली से भोपाल आए थे। मप्र में संदिग्धों का किसी वारदात को अंजाम देने के लिए भोपाल आने की जानकारी इंटेलिजेंस ब्यूरो की ओर से भी मप्र पुलिस को दी गई थी। आईएसआईएस के इंटर स्टेट मॉड्यूल द्वारा इस घटना को अंजाम देन की बात कही जा रही है।
आतंकियों द्वारा ट्रेन में ब्लास्ट करने की घटना के पीछे अक्टूबर में हुए सिमी आतंकियों के एनकाउंटर और फरवरी में सिमी सरगना सफदर नागौरी सहित सात लोगों को दी गई उम्रकैद के बदले से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। आतंकियों के तहरीक-ए-इंसाफ संगठन से जुड़े होने की बात सामने आई है। ये संगठन आईएसआईएस से जुड़ा बताया जाता है।
इस संगठन को पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा और अन्य संगठनों से फंडिंग होती है। सूत्रों की मानें तो पकड़े गए युवाओं ने बताया कि उन पर मध्यप्रदेश में किसी भी तरह से घटना को अंजाम देने का दबाव था। इधर रेलवे बोर्ड के सदस्य (यातायात) मो.जमशेद ने मुख्य सचिव बीपी सिंह से घटना के संबंध में जानकारी ली है।
बम रखकर उतर गए थे जबड़ी स्टेशन पर
जानकारी के अनुसार आतंकी सुबह भोपाल स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए। ट्रेन 8.30 बजे रवाना हुई। इस दौरान उन्होंने ट्रेन के सामान रैक में सूटकेस रखा, जिसमें बम था। 9.37 बजे ट्रेन जबड़ी रेलवे स्टेशन पर रुकी, जहां से तीनों उतर गए। ट्रेन चलने के पांच मिनट बाद ही 9.42 बजे स्टेशन से 300 मीटर की दूर ब्लास्ट हुआ। बम का ट्रिगर मोबाइल फोन था, जिसे आतंकियों ने ट्रेन से उतरने के बाद डायल किया और कुछ क्षण बाद ही धमाका हो गया।
धमाके की आवाज सुनने के बाद तीनों आतंकी पैदल ही सीहोर रोड तक गए। यहां से वे बस से राजधानी के नादरा बस स्टैंड पहुंचे और पिपरिया जाने वाली बस पर सवार हो गए। जबड़ी में आतंकियों के हुलिये पर हुई पूछताछ के आधार इनके भोपाल आने का पता चलते ही एटीएस ने फॉलो करना शुरू कर दिया। पहले सीहोर और बाद में भोपाल तक के रूट को फॉलो किया गया। भोपाल से उनके पिपरिया जाने की पुख्ता जानकारी के बाद होशंगाबाद पुलिस को अलर्ट कर नाकेबंदी करने को कहा गया।
पुरानी दिल्ली से दूसरा कनेक्शन
मप्र में ट्रेन में ब्लास्ट करने की साजिश पुरानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से रची गई। मालूम हो इससे पूर्व प्रदेश में आईएसआई नेटवर्क को चलाने वाला मास्टमाइंड जब्बार को भी पुरानी दिल्ली से ही पकड़ा गया था।
ज्यादा थे यात्री
आम दिनों की तुलना में इस पैसेंजर ट्रेन में मंगलवार को ज्यादा यात्री थे। दरअसल, मंगलवार को जिले के बोलाई स्थित श्री सिद्घवीर हनुमान मंदिर में जाने के लिए ज्यादातर यात्री इसी ट्रेन का सहारा लेते हैं। आशंका जताई जा रही है कि ट्रेन में भीड़ अधिक होने से यात्रियों को टारगेट किया गया था।
भोपाल में किसने की मदद, सवाल बरकरार
सूत्रों की मानें तो दिल्ली से भोपाल पहुंचे तीनों आतंकियों को बम भोपाल में ही दिए गए। उनकी मदद किसने की, इसकी भी जांच हो रही है। आरोपियों के पिपरिया की ओर जाने की वजह भी नरसिंहपुर और आसपास के इलाकों में सिमी के समर्थक व मददगारों के होने से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
लखनऊ-कानपुर था केंद्र
सूत्रों की मानें तो दिल्ली से रची गई प्लानिंग को अंजाम देने के लिए लखनऊ-कानपुर को केंद्र बनाया गया था। यहीं से युवाओं को ब्लास्ट के लिए तैयार किया गया और फंडिंग भी हुई। यही वजह है कि जैसे ही एमपी एटीएस ने ट्रेन में धमाकों को अंजाम देने वाले तीनों आतंकियों को पकड़ा तो उन्होंने कानपुर और लखनऊ में बैठे अपने आकाओं को नाम बताए, जिसके बाद एमपी एटीएस ने यूपी एटीएस को इसकी सूचना दी और वहां इस मामले से जुड़े अन्य आतंकियों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू हुई।
पांच लोग अब भी फरार
इस पूरे मॉड्यूल में दस आतंकियों के शामिल होने की बात सामने आई है। इनमें से तीन को पिपरिया से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि कानपुर से 18 साल के फैसल को गिरफ्तार किया गया। लखनऊ में सैफुल को इनकाउंटर में मार गिराया गया। वहीं पांच अन्य युवक अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
आतंकियों ने दहशत फैलाने के लिए बनाया था वीडियो
सूत्रों की मानें तो आतंकियों के पास से जब्त मोबाइल फोन में ट्रेन में किए गए ब्लास्ट का वीडियो भी एटीएस को मिला है। बताया जा रहा है कि दहशत फैलाने व अपने आकाओं तक घटना को अंजाम
देने का सबूत पहुंचाने के लिए यह वीडियो बनाया गया था। इधर ट्रेन में दो ब्लास्ट की बात भी कही जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो रही।
‘तेज धमाका हुआ। पूरे डिब्बे में धुआं-धुआं हो गया। मेरे कान सुन्न पड़ गए। कंधे में चोट लगी थी। ट्रेन तुरंत रुक गई थी। करीब पांच मिनट में नीचे उतर गए। इस दौरान एक महिला ने अपने दो साल के बच्चे को बचाने के लिए ट्रेन से नीचे फेंक दिया।’ – घायल शांति यादव
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