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किसानों की कर्जमाफी के लिए कर्मचारियों का DA टल गया

भोपाल। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद मिल रहे महंगाई भत्ते में मप्र इस समय केंद्र सरकार से पिछड़ गया है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 9 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि मप्र में यह 7 फीसदी है।
केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2018 से 2 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाया था, लेकिन मप्र में यह अभी तक लागू नहीं हुआ। पूर्व में तत्कालीन शिवराज सरकार ने इसे लटकाए रखा। फिर विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण दो माह निकल गए। अब कांग्रेस की नई सरकार की कर्जमाफी की प्राथमिकता के चलते यह टलता दिख रहा है। 
वित्त विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि दो फीसदी महंगाई भत्ता राज्य सरकार देती है तो उसे हर माह लगभग 60 करोड़ रुपए का भार आएगा। जुलाई से लेकर अब तक यह राशि 360 करोड़ रुपए के करीब हो गई है। इसमें राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ शिक्षक बन गए अध्यापक संवर्ग के लोग भी शामिल हैं।
वित्त विभाग का कहना है कि यदि राज्य सरकार महंगाई भत्ता अगले एक-दो माह में देने पर विचार भी करती है तो यह पैसा जीपीएफ में जाएगा। शिवराज सरकार में वित्तमंत्री रहे जयंत मलैया का कहना है कि महंगाई भत्ता नहीं देने के पीछे कोई कारण नहीं था। 

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