कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 12 से बढ़ाकर 17 फीसद करने का जो आदेश जारी किया गया था, उसे स्थगित कर दिया गया। साथ ही मई में दी जाने वाली सातवें वेतनमान की अंतिम किश्त का भुगतान भी रोक दिया गया। पहले टालने का था विचार सूत्रों का कहना है कि जुलाई से कर्मचारियों को वार्षिक वेतनवृद्घि देने का सरकार ने मन बना लिया था लेकिन वित्त विभाग ने प्रक्रिया शुरू नहीं की थी। बताया जा रहा है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस कुछ माह के लिए टालने पर विचार किया जा रहा था।

सूत्रों का कहना है कि अंतिम निर्णय के लिए मामला वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री के पास भेजा था। परिस्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तय किया है कि कर्मचारियों को वार्षिक वेतनवृद्घि का लाभ तो तय समय से दिया जाएगा लेकिन इसका भुगतान स्थितियां सामान्य होने पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री की कर्मचारियों से अपील

मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से अपील करते हुए कहा कि किसी को भी वार्षिक वेतनवृद्घि को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। कोरोना संकट के कारण प्रदेश इस समय चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। सरकार ने कोरोना से बचाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं और कोरोना से जुड़े अन्य कार्यों पर खर्च हो रहा है। आर्थिक गतिविधियों में कमी के कारण राज्य की आय में भी कमी आई है। स्थिति सामान्य होने पर कर्मचारियों को वेतनवृद्घि का वास्तविक लाभ दिया जाएगा।

उन्होंने कर्मचारियों को शासन व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि कहा कि हर कठिन समय में सरकार का साथ दिया है। सरकार भी अपने कर्मचारियों का वाजिब हक और हित, सुनिश्चित करने के लिए न कभी पीछे हटी है और न कभी पीछे हटेगी।