प्रशांत ने बताया कि गुरुवार रात हॉस्टल के ऊपर से कई लड़ाकू विमान सायरन बजाते गुजरे तो पूरे हॉस्टल में दहशत का माहौल फैल गया। प्रबंधन ने हॉस्टल की सभी लाइट बंद करवा दीं।
यूक्रेन और रशिया के ऐलान-ए-जंग के बीच कई भारतीय अब भी अपनी वतन वापसी की राह देख रहे हैं। लाखों लोगों को विदेश में रह रहे अपने बच्चों की फिक्र है। उनके रहने, खाने-पीने की चिंता में अभिभावक परेशान हैं। इस बीच यूक्रेन से एक भावुक लेकिन अच्छी खबर सामने आई है। यूक्रेन में फंसे कानपुर के प्रशांत ने अपने पिता का वहां के गंभीर हालातों के बीच एक ऐसा वाक्या सुनाया, जिसे सुनने के बाद उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। दरअसल, प्रशांत ने बताया कि जब सैकड़ों छात्र रोमानिया की ओर बढ़ रहे थे, तभी रूसी सैनिक वहां से गुजरे। उन्हें देखकर एक बार तो सभी दहशत में आ गए। लेकिन जब उन सैनिकों ने हाथ में तिरंगा देखा, तो उसे सैल्यूट किया और आगे बढ़ गए।
यूक्रेन में फंसे कानपुर के श्यामनगर पीएसी कैंपस निवासी प्रशांत सिंह ने यह बात अपने पिता को फोन कॉल पर बताई, तो बेटे की चिंता में निकलने वाले आंसू एक पल के लिए खुशी का आंसू बन गए। साथ ही वह पूरी तरह से आश्वासित भी हो गए कि तिरंगे की शरण में उनका बेटा सकुशल स्वदेश लौटेगा।
पूरे हॉस्टल में दहशत का माहौलप्रशांत के पिता नाहर सिंह पीएसी में हैं। नाहर के मुताबिक, उनका बेटा यूक्रेन की टर्नोपिल यूनिर्वसिटी में एमबीबीएस सेकंड ईयर का छात्र है। प्रशांत ने उन्हें बताया कि गुरुवार रात हॉस्टल के ऊपर से कई लड़ाकू विमान सायरन बजाते गुजरे तो पूरे हॉस्टल में दहशत का माहौल फैल गया। प्रशांत ने हॉस्टल की सभी लाइट बंद करवा दी। शनिवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुबह 9:30 बजे (भारतीय समय के अनुसार दोपहर दो बजे) सभी छात्रों को बसों में बैठाकर रोमानिया देश की सीमा से करीब आठ किमी दूर छुड़वा दिया।
सभी बसों पर लगाया भारत का तिरंगानाहर के अनुसार, सुरक्षा की दृष्टि से सभी बसों का भारत का तिरंगा लगाया गया था। सभी छात्र यूक्रेन के समय अनुसार शाम छह बजे से बस से उतरे और हाथों में तिरंगा लेकर रोमानिया की ओर चल पड़े। नाहर ने बेटे से फोन पर संपर्क किया था। हालांकि, वहां नेटवर्क की समस्या है। व्हाट्सएप के माध्यम से प्रशांत ने उन्हें आखिरी बार बताया था कि सैकड़ों छात्र पैदल करीब तीन किमी का सफर तय कर चुके हैं।
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