बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे -डॉ रिंकी वर्मा
मेडिकल कॉलेज डॉक्टर के वी वर्मा और उनकी धर्मपत्नी डॉक्टर रिंकी वर्मा ने बाल दिवस को अनूठे तरीके से मनाया। वहीं रिंकी वर्मा ने सेवा भारती द्वारा संचालित सहरिया बनवासी बालक छात्रावास फतेहपुर, बाल ग्रह के बच्चों के बीच पहुंचकर गरीबों में कपड़े बांटकर व मिठाई खिलाकर मनाया। और उन्हें अपने साथ मेडिकल कॉलेज लेकर आईं और कॉलेज घूमाने के साथ- साथ बच्चों का संबंधित डॉक्टर से चेकअप कराया और क्लासरूम में बैठाकर एक अच्छे इंसान बनने के साथ एक ईमानदार अधिकारी बनने का हौसला दिया और ने भी हर संभव मदद करने की बात कही।
इस दौरान डॉक्टर रिंकी के पति मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर के बी वर्मा ने कहा कि हमने आदिवासी बच्चों में बाल दिवस नहीं मनाया बल्कि गरीबों के बीच पहुंचकर मुझे जो एहसास हुआ जिससे लगा कि ये मेरे लिए गरीब नहीं ईश्वरीय है, जहां मुझे आत्मीयता की बरसात मिली जो किसी स्वर्ग से बढ़कर है और हृदय से लगाकर दुआएं मिली जो मेरे लिए अमूल्य निधि से कम नहीं फिर इस ईश्वरीय लोगों के चरणों में कौन बाल दिवस के रुप में नहीं मनाएगा।
रिंकी ने कहा बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे
गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करने से इंसानियत की मिसाल कायम होती है। युवाओं को इस बारे में सोचकर इंसानों के लिए काम करना चाहिए। डॉ रिंकी वर्मा हमेशा समाज सेवा के कार्य में निस्वार्थ भाव से योगदान देती रहती है और उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ आने का उद्देश आपस में खुशियां बांटना है इसी के साथ ही छात्रावास के बच्चों को रजाई भेंट की।
वहीं रीना सोनी का कहना था कि असहाय व गरीब बच्चों संग अपनी खुशी के पल साझा करने के दौरान इन बच्चों के चेहरों पर काफी खुशी देखने को मिली। बच्चे ईश्वर का रूप माने जाते हैं, जिनकी मुस्कान से ईश्वर भी प्रसन्न होते हैं।
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