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कांग्रेस लेने जा रही है ये बड़ा फैसला! अब इसे देगी सीधे चुनौती

भोपाल। प्रदेश में 60 लाख बोगस मतदाता होने संबंधी शिकायत खारिज हो जाने के बाद कांग्रेस अब चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देगी। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग को 101 विधानसभा क्षेत्रों की प्रमाण सहित शिकायत की गई थी, लेकिन सिर्फ 4 विधानसभा क्षेत्रों की जांच कर फैसला सुना दिया गया। कानूनी राय लेने के बाद पार्टी आयोग को पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकती है या कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताआें से चर्चा की। वे सोमवार को भोपाल में बैठक करेंगे।

पचौरी के ट्वीट: उठाए तीन सवाल
– मतदाता सूची एक जनवरी 2018 की रिवाइज्ड है। चुनाव आयोग मिलान कर सकता है। पुरानी गलत मतदाता सूची के लिए जिम्मेदार कौन है।

– मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बोगस वोटर की बात स्वीकारती हैं, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त बूथों पर जाए बिना, जांच किए बिना क्लीनचिट देता है?

– जांच रिपोर्ट एकतरफा और वस्तुस्थिति के विपरीत है। जांच टीम शिकायतकर्ताओं से मिली ही नहीं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया: चुनाव आयोग को सभी १०१ विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची की जांच करना चाहिए थी, लेकिन एेसा नहीं हुआ। आयोग ने सिर्फ पांच विधानसभा क्षेत्रों की जांच कराई और रिपोर्ट दे दी। सूची की घर-घर जाकर जांच होना चाहिए।

कोई भी हथकंडा अपना सकती है कांग्रेस: सिंह 
चुनाव आयोग ने त्वरित कार्रवाई कर राजनीति में स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है तो वह संवैधानिक संस्थाओं को भी बदनाम करने से नहीं चूक रही है। उसकी करतूत से जनमानस में उसका बचा-खुचा स्थान भी समाप्त हो जाएगा। 
राकेश सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

 

कांग्रेस प्रदेश की जनता से मांगे माफी: झा
कांग्रेस ने बोगस वोटर की शिकायत करके प्रदेश की जनता को अपमानित किया है। कांग्रेस नेताओं को प्रदेश की जनता से माफी मांगना चाहिए। इस फर्जी शिकायत से विश्व के कई अखबारों में खबरें छपी और प्रदेश की बदनामी हुई है।
प्रभात झा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

यह है मामला 
3 जून को कांग्रेस ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत को प्रदेश के १०१ विधानसभा क्षेत्रों की सूची सौंपी थी। इसमें ६० लाख बोगस वोटर होने का दावा था। इसमें कई मतदाताओं के नाम एक से अधिक बार थे। कुछ के नाम अलग, लेकिन फोटो एक समान थे, कई के नाम एक से अधिक विधानसभाओं और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के कई मतदाता यहां की मतदाता सूची में दर्ज होना बताया गया। आयोग ने इस पर तत्काल जांच के आदेश दिए थे

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