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चुनाव प्रणाली पर सवाल खड़े कर हम देश को बैकफुट पर ले जा रहे हैं

om prakash rawat ec 16 04 2017पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ ग्वालियर –लोकतांत्रिक विश्व में भारत को उसके निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के कारण ही हमेशा ऊंचा स्थान प्राप्त हुआ है। हाल में दुनिया के 19 देशों ने भारत के साथ एमओयू किया है, जिसके तहत ये राष्ट्र भारत से निष्पक्ष चुनाव कराना सीखेंगे। लेकिन इस समय देश के अंदर ही चुनाव प्रणाली पर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ईवीएम को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवाल गैर जरूरी हैं। राजनीतिक दलों और मीडिया को सोचना चाहिए कि अपनी ही चुनाव प्रणाली पर सवाल खड़े करके कहीं हम जाने-अनजाने में देश को विश्वमंच पर बैकफुट पर तो नहीं ले जा रहे हैं।

मंथन न्यूज़ से विशेष चर्चा में देश के चुनाव आयुक्त ओमप्रकाश रावत ने यह चिंता जाहिर की। श्री रावत का कहना है कि ईवीएम को लेकर हर स्टेज पर टेस्टिंग की जा चुकी है। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी संभव ही नहीं है। इसलिए फिलहाल चुनाव आयोग ईवीएम को छोड़ने के मूड में नहीं है। उन्होंने कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा की।
सवाल- भिंड में अटेर विधानसभा के उप चुनाव से पूर्व जो ईवीएम की टेस्टिंग हुई, उसमें गड़बड़ी पकड़ में आई थी। फिर ईवीएम पर कैसे भरोसा करें? 
जवाब- ईवीएम की टेस्टिंग बहुत उच्च मानकों पर होती है। इसमें किसी एक दल के पक्ष में ही वोटिंग होने जैसी गड़बड़ी संभव ही नहीं है। भारत निर्वाचन आयोग कई मंचों पर इस बात को स्पष्ट भी कर चुका है।
सवाल- कई राजनीतिक दल ईवीएम पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। वे बैलेट पेपर से चुनाव कराना चाहते हैं?
जवाब- देखिए, ये प्रजातंत्र है। निष्पक्ष चुनाव और सबकी सहमति ही प्रजातंत्र की मूल ताकत है। लोग चाहते हैं कि चुनाव ईवीएम से हो तो चुनाव ईवीएम से होने चाहिए। अगर वे चाहते हैं कि चुनाव बैलेट पेपर पर हो तो बैलेट से चुनाव होने चाहिए। लेकिन आम सहमति का बनना जरूरी है। देश में इस समय कुछ राजनीतिक दल बैलेट की मांग कर रहे हैं तो कई राजनीतिक दलों का भरोसा ईवीएम पर है। ऐसे में जब तक आम सहमति नहीं बनती हैं, तब तक भारत निर्वाचन आयोग ईवीएम से ही चुनाव कराएगा।
सवाल- क्या आपको लगता है कि मप्र की चुनाव आयुक्त सलीना सिंह द्वारा इस विषय पर गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिसके कारण ही ईवीएम की निष्पक्षता पर देशभर में सवाल खड़े हुए? 
जवाब- चुनाव आयोग का काम कोई मजाक नहीं है। उन्होंने भिंड में दिए अपने बयान को पत्रकारों के साथ हंसी-मजाक करना बताया, जो कि पूरी तरह से गलत है। चुनाव आयोग के अधिकारियों को मजाक में भी इस तरह का मजाक नहीं करना चाहिए। चुनाव आयोग हर स्टेज पर अपने निर्वाचन आयुक्तों से गंभीर व्यवहार की उम्मीद करता है।
सवाल- विश्व के जिन 19 राष्ट्रों के साथ भारत का एमओयू हुआ है, उन देशों में निर्वाचन आयोग किस तरह भूमिका निभाएगा? 
जवाब- अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया, म्यांमार, फिलिपींस, सहित साऊथ एशिया के 10 देशों, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, न्यूजीलैंड, इक्वाडोर सहित लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कुछ देशों को मिलाकर कुल 19 देशों के निर्वाचन आयुक्तों को ईवीएम और बैलेट पेपर दोनों से ही निष्पक्ष चुनाव कराने की ट्रेनिंग देना हैं। इनमें से कई देशों के साथ हमारा पूर्व से अनुबंध चला आ रहा है। इस अनुबंध के तहत इन देशों के निर्वाचन आयुक्त हमारे देश में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखने आएंगे और हम भी अपने निर्वाचन आयुक्तों को इनके देशों में भेजेंगे। दिल्ली के द्वारका में 120 करोड़ स्र्पए की लागत से भारत निर्वाचन आयोग ने एक ट्रेनिंग सेंटर खोला है। इसकी इमारत में इन देशों के निर्वाचन आयुक्तों और उनके अधिकारियों को ट्रेनिंग देना शुरू भी कर दिया है।
सवाल- विश्व में भारत की चुनाव प्रणाली को किस रूप में देखा जाता है। 
जवाब- हमारे देश के मुख्य चुनाव आयुक्त पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री पद के चुनाव में ऑब्जर्वर के रूप में गए थे। दुनिया के कई देश भारत के निर्वाचन आयुक्तों को बुलाते हैं। भारत निर्वाचन आयोग के इसी दबदबे की वजह से दुनिया निर्वाचन प्रणाली को लेकर हमारी ओर देख रही है।

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