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योगी के सीएम बनने के बाद बीमारों के जख्म पर मरहम की उम्मीद

encephalitis 19 03 2017पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ गोरखपुर –लगातार पांच बार से गोरखपुर के सांसद महंत योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल के लिए नासूर बने इंसेफ्लाइटिस को लेकर शुरू से की गंभीर रहे हैं। संसद में कदम रखने के बाद से ही वह पुरजोर तरीके से इसकी रोकथाम व इलाज के मुद्दा उठाते रहे हैं।

उन्होंने बेहद नजदीक से इंसेफ्लाइटिस से दम तोड़ते मासूमों की पीड़ा को महसूस किया है। इंसेफ्लाइटिस के सीजन में मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग से जुड़े वार्डों में इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित मासूमों से भरे रहते हैं। डाक्टरों व स्टाफ की पूरी कोशिशों के बावजूद मासूम यहां संसाधनों की कमी से दम तोड़ते हैं। तब योगी आदित्यनाथ समय-समय पर जाकर न केवल व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए न केवल दिशा निर्देश देते रहे हैं बल्कि कमियों को दूर करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार के सामने अपनी आवाज मजबूती से उठाते रहे हैं।
यही वजह है उनको इस संबंध में जमीनी हकीकत की पूरी जानकारी रही है।
जानकारी के कारण ही उन्होंने बार-बार यह संसद में यह मुद्दा बिंदुवार उठाया। इसका नतीजा रहा कि केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। रोकथाम व इलाज के लिए न केवल गंभीर कोशिशें की जा रही हैं, बल्कि देश-विदेश के विशेषज्ञ यहां लगातार बीमारी के कारण व उन्मूलन की दिशा में शोध कर रहे हैं। अब उनके हाथ में सूबे की कमान मिलने से न केवल बीमारी के रोकथाम व बेहतर इलाज बल्कि बीमारी के उन्मूलन की उम्मीद भी बढ़ी है।
एम्स के निर्माण को भी लगेंगे पंख
अब तक केंद्र व राज्य में अलग-अलग दल की सरकारें होने से एम्स की घोषणा, जमीन मिलने, निर्माण शुरू होने के देरी हुई। अब योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद एम्स के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद बंधी है। वजह कि पूर्वांचल में दयनीय स्वास्थ्य व्यवस्था को नजदीक से देखने वाले योगी आदित्यनाथ खुद शुरू से ही एम्स की मांग को मजबूती से उठाते रहे हैं।
बीआरडी को भी उम्मीद
अब बदले हालात में पूर्वांचल में सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र बीआरडी मेडिकल कालेज की तस्वीर बदलने की उम्मीद बंधी है। पूर्वांचल के साथ पश्चिमी बिहार व नेपाल के मरीजों के इलाज का यह एकमात्र केंद्र इस समय बदहाली का शिकार है। डाक्टरों व संसाधनों की कमी से यहां एमबीबीएस की मान्यता तक खतरे में है।
अब तक 25 हजार मौतें
1978 में दस्तक देने के बाद इंसेफ्लाइटिस अब तक 25 हजार से अधिक जानें ले चुकी है। इतनी बड़ी तादाद में मौतों के बावजूद अब तक बीमारी की रोकथाम व इलाज की पूरी व्यवस्था हो पाई है। यहां तक कि विशेषज्ञ बीमारी का कोई ठोस नहीं दे पाए हैं।

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