Breaking News

15 हजार कार्यकर्ताओं ने बनाईं 20 हजार संरचनाएं, रुकेगा वर्षा का जल

मंथन न्यूज़ झाबुआ,। शिवगंगा द्वारा आयोजित हलमा कार्यक्रम रविवार को 9 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हाथीपावा की पहाड़ियों पर हुआ। इसमें लगभग 15 हजार कार्यकर्ताओं ने 4 घंटे में करीब 20 हजार संरचनाओं का निर्माण किया। इनमें पुराने कंटूर ट्रेंच की मरम्मत, नए ट्रेंच का निर्माण और पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदने का काम हुआ। परमार्थ की ये परंपरा देखने दूर-दूर से पर्यावरणविद, समाजसेवी, नौकरीपेशा और छात्र पहुंचे। निस्वार्थ सेवा का ये उत्साह देख वो लोग दंग रह गए। मेहमानों ने कहा, ये भावना दूसरे स्थानों पर कुछ लोगों में भी पैदा हो जाए तो पर्यावरण को फिर से संजोना बड़ा काम नहीं रह जाएगा।
खुद का खर्च, साथ लाए गैती और तगारीjhabuanews 201735 175922 05 03 2017
हलमा कार्यक्रम के लिए जिले के सैकड़ों गावों से ट्रैक्टरों और जीपों में सवार होकर कार्यकर्ता परिवार के साथ शनिवार को यहां पहुंचे। ये लोग अपने खर्च पर यहां आए और गेतियां व तगारियां साथ लेकर आए। शनिवार को गैती यात्रा निकली। रविवार सुबह पौ फटते के पहले ही पैदल समूह बनाकर सारे कार्यकर्ता हाथीपावा की पहाड़ियों पर पहुंच गए। आते ही बिना इंतजार के इन लोगों ने अपने-अपने समूह के हिसाब से बंटे क्षेत्र में श्रमदान शुरू कर दिया। पुरुषों, महिलाओं ने अथक मेहनत की। बच्चे भी पीछे नहीं थे। कई बच्चों ने कार्यकर्ताओं तक पीने के पानी की बोतलें भेजने का जिम्मा उठा रखा था।
छात्रों ने भी आजमाए हाथ
आयोजन में हिस्सेदारी के लिए इंदौर, मुंबई, दिल्ली, पुणे, रुढ़की, अहमदाबाद, बैंगलुरू और अन्य कई शहरों की युनिवर्सिटी और कॉलेजों के विद्यार्थी आए। इन छात्र-छात्राओं ने भी गैती हाथों में लेकर परमार्थ की इस परंपरा में अपनी सहभागिता की। आईआईटी बांबे से आए प्रोफेसर गणेश राव, छात्र आशु यादव, आशिक, गुलाब सरताज, रोशनी तानिया ने कहा, ऐसा हमने पहली बार देखा। पूरी पहाड़ियों पर चींटी की तरह लोग ही लोग कतार से काम करते दिख रहे हैं। उनके गजब का अनुशासन और गजब का सेवाभाव है।
हमने शहरों में कभी ऐसा नहीं देखा। हर कोई अपने में ही व्यस्त है। किसी को दूसरे के बारे में सोचने क्या, उसकी तरफ देखने का भी समय नहीं है। समय हो तो भी लोग दूसरों के काम से बचना चाहते हैं, लेकिन यहां तो कई किमी का सफर करके गांव के लोग आए और थकाने वाली मेहनत कर रहे हैं। इससे उन्हें फायदा नहीं है, सिर्फ दूसरों के लाभ, पर्यावरण के संरक्षण और परमार्थ का संदेश देने के लिए वो ऐसा कर रहे हैं।
बदला पहाड़ियों का स्वरूप
सुबह जब श्रमदान शुरू हुआ तो पहाड़ियों की रंगत कुछ अलग थी और काम पूरा होने के बाद इनकी रंगत अलग ही दिखाई देने लगी। पूरे क्षेत्र में किया गया काम साफ तौर पर दिखाई देने लगा। न कोई काम कराने वाला और न ही कोई तकनीकी एक्सपर्ट इन लोगों को काम कैसे करना है, ये बता रहा था। यहां आए सारे लोग अनुशासित और जानकार थे। उन्होंने देखते ही देखते कंटूर ट्रेंच बनाकर पहाड़ी की सूरत बदल दी। इन संरचनाओं से न सिर्फ इन पहाड़ियों की सीरत बदलेगी, आसपास के बड़े क्षेत्र की भी सीरत बदल जाएगी।
धर्मसभा और कथा में दिखी रुचि
रविवार को हुए श्रमदान के पूर्व शनिवार रात कॉलेज ग्राउंड पर धर्मसभा का आयोजन किया गया। यहां कोल्हापुर से आए काठ सिद्धेश्वर स्वामी मौजूद रहे। बाबा सत्यनारायण मौर्य ने पांच देवों की कथाएं यहां आए लोगों को चित्रों के स्वरूप में बताई। हजारों लोगों ने रुचि के साथ इसमें सहभागिता की। इस दौरान मंच पर शिवगंगा के महेश शर्मा और बाहर से आए कुछ अतिथि मौजूद रहे। रात को आदिवासी गीतों पर ढोल-मांदल के साथ नाच-गाना भी होता रहा।
आईआईटी करेगी सर्वे, उस हिसाब से होगा काम
रविवार को हलमा कार्यक्रम में कलेक्टर आशीष सक्सेना, सीईओ जिला पंचायत अनुराग चौधरी, एसपी महेशचंद जैन भी पहुंचे। यहां कलेक्टर और अन्य अधिकारियों ने पूरे हाथीपावा क्षेत्र का संपूर्ण सर्वे करने के लिए आईआईटी दिल्ली और जीएसआईटीएस इंदौर की को कहा। उनसे कहा गया कि यहां की जैविक स्थिति और संभावनाओं का संपूर्ण सर्वे करके जिला प्रशासन को दे। इस सर्वे के आधार पर जिला प्रशासन यहां की कार्ययोजना तैयार करेगा।
– 15 हजार लोगों ने 20 हजार संरचनाओं का निर्माण किया
-9 वर्ग किमी में फैली हाथीपावा की पहाड़ियों पर 4 घंटे किया श्रमदान
– 6 करोड़ लीटर बारिश का पानी हर साल रोकेंगे ये ट्रेंच, इससे बढ़ेगा भूजल स्तर
– 8 से 10 हजार लोगों के लिए सालभर के उपयोग जितना है ये पानी
– 500 से ज्यादा लोग देशभर से आए इस अनूठे आयोजन को देखने

Check Also

शिवपुरी (मध्यप्रदेश) में आयोजित हो रहे रोटरी मेडिकल मिशन के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन  करें अधिक जानकारी के लिए लिंक खोले

🔊 Listen to this शिवपुरी (मध्यप्रदेश) में आयोजित हो रहे रोटरी मेडिकल मिशन के निःशुल्क …