कवि इन्जी.सोनू सीताराम धानुक सोम लिखित कविता “मेरा मन” “”मेरा मन”” कभी लहरों सा चंचल था मेरा मन.. कभी ज्वाला सा भड़कता था मेरा मन.. आख़िर आज क्यों रोता मेरा मन,, मासूमियत होती लाचार,, मासूमों पर होता दुराचार,, नारियों पर भारी अत्याचार,, दुराचारियों कि तादाद होती अपार,, इसलिए रोता आज …
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