गोविंद सिंह और तुलसी सिलावट ने रिनोवेशन से किया इंकार, बोले जिसने टोंटी बदली उसे ही देना होगा पैसा
यह स्थिति तो तब है, जब इनमें पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री पहले से ही निवास कर रहे थे। उन्होंने खाली किया तो लोक निर्माण विभाग ने ताबड़तोड़ 34 बंगलों का ऐस्टीमेट बनाकर काम शुरू कर दिया। बजट स्वीकृत होने के पहले ही बंगलों में काम चालू हो गया। दिसंबर के आखिरी सप्ताह ही सभी बंगलों में तेजी से काम चल रहा है, लेकिन कई का काम अभी अधूरा ही है।
गोविंद-तुलसी ने पेश की मिसाल
सहकारिता मंत्री डा गोविंद सिंह और तुलसी सिलावट ऐसे भी मंत्री है, जिन्होंने लोक निर्माण विभाग, अपने स्टाफ और अन्य को निर्देश दे दिया कि उनकी अनुमति के बिना किसी भी तरह की फिजूलखर्ची नहीं होगी। यदि किसी ने नंबर बढ़ाने के लिए कोई काम करवा भी दिया तो उसका पूरा खर्च संबंधित से ही वसूला जाएगा। गोविंद सिंह ने बहुत आवश्यक काम के अलावा तोडफ़ोड़ और अन्य काम करने से इंकार कर दिया।
जबकि इनके बंगले का रिनोवेशन के लिए अफसरों ने 20 लाख 50 हजार रुपए का प्रस्ताव बनाया है। वहीं तुलसी सिलावट पहले ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने किसी तरह का रिनोवेशन करवाने के बजाय सबसे पहले पजेशन लिया। तुलसी ने भी बेकार की तोडफ़ोड़ और खर्चे से इंकार कर दिया। अफसरों ने इनके बंगले बी-7 चार इमली की मरम्मत के लिए 32 लाख 75 हजार रुपए का प्रस्ताव बनाया है।
… और सज्जन-साधो में लगी है होड़
इधर, लोक निर्माण विभाग मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का बंगला बी-10 चार इमली को सितारा स्तर से रिनोवेट किया जा रहा है। इस बंगले के रिनोवेशन के लिए आधिकारिक तौर पर 31.13 लाख रुपए खर्च का आकलन किया गया है, लेकिन विभागीय मंत्री होने के नाते अफसर अतिरिक्त एहतियात बरत कर अपने स्तर पर बंगले को आलिशान बनाने में लगे हुए हैं। काम पूरा होने से पहले ही इसे तीन सितारा बंगला तक कहा जाने लगा है। इसकी भव्यता देख कर पड़ोसी बंगले बी-11 चार इमली आवंटी चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ भी होड़ में आ गई। उन्होंने विभाग के अफसरों पर दबाव बनाना शुरु कर दिया कि बी-10 जैसा ही बी-11 होना चाहिए। अब अफसर भी परेशान है।
बी-6 सिविल लाइन पर डेढ़ करोड़ से होगी मरम्मत
सिविल लाइन स्थित बी-6 बंगले पर सबसे अधिक खर्च होगा। इसके लिए 1 करोड़ 47 लाख 44 हजार रुपए का प्रस्ताव बनाया गया है, जिसे प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बाद करबला स्थित कसाना बंगले पर 35.68 लाख खर्च होगा। सबसे कम विंध्य कोठी पर 9.23 लाख खर्च होगा।
लोक निर्माण विभाग मंत्री सज्जन सिंह वर्मा से सीधी बात
सवाल- मुख्यमंत्री कमलनाथ कह रहे हैं कि मितव्ययता बरती जाए, आपने तो बंगलों पर खर्च करने के लिए 10 करोड़ की स्वीकृति दे दी?
जवाब- अभी सिर्फ 4 करोड़ की ही स्वीकृति दी है। कम से कम में ही हम काम करेंगे, जिसमें बंगले रहने लायक बन सके।
सवाल- 2 फरवरी को 10 करोड़ की स्वीकृति दी गई और इन बंगलों में पहले भी तो मंत्री रह रहे थे?
जवाब- पूर्व के मंत्रीगण इनमें से नल की टोंटियां तक निकाल ले गए। हम चौबीस घंटे काम करते है, ऐसे में सुकून की नींद लेने के लायक आवास भी न मिले तो कैसे काम करेंगे।
सवाल- जो टोंटियां निकाल कर ले गए और जिन्होंने बंगलों से सामान निकाला उन्हें एनओसी कैसे मिल गई?
जवाब- एनओसी मिल जाती है। यदि हम नहीं देंगे तो बदले की भावना का आरोप लगेगा। कांग्रेस बदले की भावना से काम नहीं करती और न ही हम ऐसा करना चाहते हैं।
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