दरअसल, गोपाल भार्गव कर्नाटक में सरकार गिरने के बाद प्रतिक्रिया दे रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि लंगड़ी सरकारों का यही हाल होता है. अब कर्नाटक में बेहतर तरीके से विकास होगा. इसके आगे उन्होंने कर्नाटक की तुलना मध्यप्रदेश से की और कहा कि मध्यप्रदेश की भी लगभग यही स्थिति है, क्योंकि यहां जो ट्रांसफर उद्योग चल रहा है, किसानों के साथ छल कपट कर उनसे वोट ले लिए. मध्यप्रदेश में लूट-खसोट, भ्रष्टाचार और चारों ओर हाहाकार मचा है. मुझे विश्वास है मध्यप्रदेश की सरकार भी अपना पिंडदान करवाएगी.
हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब गोपाल भर्गव ने ऐसा बयान दिया हो. लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद भी गोपाल भार्गव ने राज्यपाल से विधानसभा का सत्र जल्द से जल्द बुलाने की मांग की थी, ताकि मोदी लहर में फ्लोर टेस्ट करवा सके.
क्या है मध्यप्रदेश का नंबर गेम
मध्यप्रदेश में इसलिए भी सबकी निगाहें टिकी रहती हैं क्योंकि 230 विधायकों की विधानसभा में किसी भी पार्टी के पास बहुमत नहीं है. मध्यप्रदेश में बहुमत का आंकड़ा 116 है, जबकि सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के पास 114 विधायक है यानी बहुमत से दो कम.
कांग्रेस ने बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई हुई है. आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं तो वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी विधायकों की संख्या के मामले में सत्ताधारी दल से ज्यादा पीछे नहीं है. बीजेपी के पास 109 विधायक थे, लेकिन हाल ही में रतलाम-झाबुआ सीट से सांसद बनने के बाद स्थानीय बीजेपी विधायक ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया जिसके बाद अब बीजेपी के पास 108 विधायक हैं.
विधानसभा में 4 निर्दलीय विधायक है. 2 विधायक बसपा से है और एक विधायक समाजवादी पार्टी से.
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