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निजी गोशाला खोलने 10 एकड़ तक जमीन देगी सरकार

पिछले कुछ सालों से सियासत के केंद्र में रही गायों के लिए प्रदेश सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। गोरक्षा के नाम…

ManthanNews.in
पिछले कुछ सालों से सियासत के केंद्र में रही गायों के लिए प्रदेश सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। गोरक्षा के नाम पर मॉब लिंचिंग के प्रकरणों में 6 माह से 3 साल तक की सजा के लिए सरकार गोवंश वध प्रतिबंध (संशोधन) विधेयक 2019 का कैबिनेट से अनुमोदन कर चुकी है। अब सरकार ऐसी संस्थाओं को नि:शुल्क 10 एकड़ तक सरकारी जमीन देने की तैयारी कर रही है, जो निजी स्तर पर गोशाला खोलना चाहते हैं। पशुपालन विभाग निजी गोशालाओं को जमीन देने के लिए नई पॉलिसी तैयार कर रहा है। इसमें एनजीओ और धार्मिक संस्थाओं को गोशाला के लिए ग्रामीण इलाकों में जमीन आवंटित करने का प्रावधान होगा। 
ऐसी ग्राम पंचायतें, जहां कुल भूमि का 2% से अधिक चरनोई जमीन मौजूद है, वहां गोशालाओं के लिए जमीन दी जाएगी। किसी भी संस्था को अधिकतम 10 एकड़ जमीन दी जाएगी। गोशाला के अलावा इस भूमि का कोई दूसरा इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। हर गांव में गोशाला खोलने के चुनावी वादे को पूरा करने के लिए सरकार अब निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए यह दांव चल रही है। बीते दिनों मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रोजेक्ट गोशाला की समीक्षा के लिए अफसरों के साथ बैठक कर चुके हैं। इसमें गोशाला खोलने के लिए निजी संस्थाओं को सरकारी जमीन देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पशुपालन विभाग गोशाला के लिए जमीन आवंटन पर नई नीति बनाने में जुट गया है। गौरतलब है कि पशुपालन विभाग के मुताबिक भोपाल में 11 हजार बेसहारा गायें हैं। 2012 में 5171 बेसहारा गायें थीं। 2019-20 में 20 ग्राम पंचायतों में सरकारी गोशालाएं खोला जाना प्रस्तावित है। 
सरकार का फैसला… गोशाला बंद की तो जमीन सरकार को उसी सेटअप के साथ लौटानी होगी, जैसी वह है 
ऐसी होगी पॉलिसी 
शासन की प्रस्तावित पॉलिसी में निजी संस्थाएं आवेदन के बाद सरकारी जमीन पर गोशाला चलाने का अधिकार पा सकेंगी। इसमें जमीन का मालिकाना हक सरकार का ही रहेगा। 
गोशाला के लिए जमीन उपलब्ध कराने के बाद सरकार कोई आर्थिक मदद नहीं देगी। संस्था को अपने खर्च पर गोशाला खोलना होगी। इसके साथ ही गोवंश का पूरा ब्योरा सरकार को देना होगा। 
अगर कोई संस्था जमीन लेकर गोशाला बंद करती है तो जमीन सरकार को लौटानी होगी। संस्था द्वारा गोशाला के लिया बनाया गया सेटअप वापस लेने का अधिकार नहीं होगा। यानी निर्मित गोशाला को उसी स्थिति में छोड़ना होगा जैसी वह है। भले ही संस्था का कितना भी खर्च क्यों न हुआ हो। 
प्रत्येक जिले से लेकर ब्लॉक तक में पशु कल्याण समिति बनाई जाएगी। ये समितियां अपने जिलों में गोशालाओं की मॉनिटरिंग करेंगी। इनके पास समन्वय का काम रहेगा। 
गोशाला विदेशों में बसे अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) की संस्था भी चला सकेगी। शासन स्तर से एनआरआई क्लब के जरिए संपर्क किया जाएगा। एनआरआई गोशाला चलाने के लिए दान दे सकेंगे। गायों के लिए चारे पर अनुदान की व्यवस्था सरकारी गोशाला में दी जाएगी। 
11 हजार बेसहारा गायें हैं भोपाल में। 
वर्ष 2019-20 में प्रदेश की 20 ग्राम पंचायतों में सरकारी गोशालाएं खोला जाना प्रस्तावित है। 
पहले से गोशाला के लिए काम कर रहीं जिम्मेदार संस्थाओं को दी जाएगी तवज्जो 

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