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कवयित्री दिव्या भागवानी द्वारा लिखी कविता गम में मुस्कुराने वाले लड़के

परिवार की खुशी में खुशी मनाने वाले लड़के
कमाल के होते हैं गम में भी मुस्कुराने वाले लड़के

दिन रात परिवार के लिए ही तो कमाते हैं
गजब होते हैं घर चलाने वाले लड़के

उनके चेहरे पर गम कभी दिखता ही नहीं
कलाकार होते हैं यह गम छुपाने वाले लड़के

सदा ही बड़ों का मान सम्मान करते हैं
मुझे भाते हैं रोज मांँ के चरण छूने वाले लड़के
स्नेह मांँ और पत्नी से वह बराबर का करते हैं
दिल छू लेते हैं यूं पलकों पर बिठाने वाले लड़के
दिव्या भागवानी

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