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जब सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री का आदेश मानने से कर दिया इंकार –

मंथन न्यूज़ –स्‍वतंत्र भारत में हमेशा ही सेना सरकार के अधीन रही और यहां पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की तरह कभी भी तख्तापलट का कोई इतिहास नहीं रहा। मगर कुछ मौके ऐसे भी आए जब सरकार और सेना के अलग-अलग बयानों के कारण दुनियाभर में ये संदेश गया कि भारत सरकार और भारतीय सेना के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। हालांकि ये भारतीय लोकतंत्र की खासियत थी कि ऐसे मसले चंद दिनों में आपसी बातचीत से सुलझ गए।
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ऐसा ही एक वाकया उस समय का है जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री और जनरल पीएन थापर सेना प्रमुख थे। 1960 से 1962 के बीच चीनी सेना ने जब कई बार भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की तो नेहरू ने थापर को निर्देश दिए कि वे चीनी सेना को भारतीय इलाकों से बाहर खदेड़ दें। मगर तब थापर ने इस आदेश को मानने से मना कर दिया। थापर का तर्क था कि भारतीय सेना अभी चीन से मुकाबले की स्थिति में नहीं है। चीन के पास भारत के एक सैनिक के मुकाबले छह सैनिक हैं। सेना प्रमुख का यह तर्क उस समय की परिस्थितियों के मुताबिक एकदम सही था, क्योंकि बिना तैयारी के चीन से लड़ना बर्र के छत्ते में हाथ डालने जैसा था।
मगर सेना प्रमुख की मनाही से नेहरू खफा हो गए। यह बात गोपनीयता की सरहद लांघकर बाहर आ गई। इससे यह संदेश फैल गया कि प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख में मतभेद हैं। स्थिति विपरीत होते देख सरकार और सेना के प्रतिनिधि तुरंत साथ बैठे और दुनिया को संदेश दिया कि भारत में सत्ता और सेना साथ-साथ हैं तथा यहां विरोध की कोई गुंजाइश नहीं

                                                  पूनम पुरोहित 

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