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लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने फिर लिया इंदिरा का सहारा, इंदिरा गांधी के 'तीसरे बेटे' ने शुरू की योजना

   

लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने फिर लिया इंदिरा का सहारा, इंदिरा गांधी के ‘तीसरे बेटे’ ने शुरू की योजना

भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा माना जाता है। इंदिरा गांधी ने खुद कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा कहा था। मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों लोकसभा चुनाव की गर्माहट है। ऐसे में कमलनाथ प्रदेश में विधानसभा की तरह लोकसभा में भी कांग्रेस को जीत दिलाने की कोशिशों में जुटे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव तक कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा है। कमलनाथ कैबिनेट ने प्रदेश में दो नई योजनाएं शुरू करने की घोषणा की है। ये दोनों ही योजनाएं पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के नाम से शुरू की जाएंगी।

क्या है योजना
कमलनाथ सरकार ने जो योजनाएं लांच करने की घोषणा कि है। उसमें इंदिरा किसान ज्योति योजना और इंदिरा गृह ज्योति योजना नाम दिया गया है। इन योजनाओं के तहत किसानों का बिजली टैरिफ आधा कर दिया जाएगा और 100 यूनिट बिजली 100 रुपये की कीमत पर असंगठित मजदूरों की जाएगी। शिवराज सिंह चौहान सरकार में चल रही सरल बिजली योजना को इंदिरा गृह ज्योति योजना का नाम दे दिया गया है। गरीबी रेखा से नीचे के वृद्ध और विधवा पेंशन योजना को भी इंदिरा वृद्ध पेंशन योजना का नाम दे दिया गया है और राशि को 300 रुपये बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया गया है।
 
 
इंदिरा ने माना था तीसरा बेटा
40 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर चुनाव प्रचार करने के लिए पहुंची थी। कांग्रेस के उम्मीदवार थे कमलनाथ। इस दौरान वहां सभा को संबोधित करते हुए इंदिरा गांधी ने कहा था कि राजीव और संजय गांधी के बाद कमलनाथ मेरे तीसरे बेटे हैं। अब कमलनाथ इंदिरा गांधी के नाम पर योजनाएं शुरू करके एक बार फिर सियासत में इंदिरा के सहारे कांग्रेस की वापसी करना चाहते हैं।
राजनीतिक लाभ मिलेगा
जानकारों का कहना है कि कमलनाथ एक गंभीर राजनेता हैं। कमलनाथ ने जिस तरह से सिंधिया और दिग्विजय खेमे में सामंजस्य स्थापित किया है वह बेहतर राजनीति का उदाहारण है। कमलनाथ इंदिरा गांधी और संजय गांधी के करीबी रहे हैं। कमलनाथ सत्ता में आने के बाद एक बार फिर से संजय और इंदिरा के समर्थक रहे लोगों का वोट बैंक कांग्रेस के पाले में लाना चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस एक बाऱ फिर से इंदिरा गांधी के नाम पर योजनाएं चला रही है। हालांकि कुछ जानकारों का मामना है कि अब लोग नाम से नहीं बल्कि योजना से मिलने वाले लाभ से प्रभावित होते हैं। कांग्रेस एक बार फिर दिल्ली अपने नाम करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में कमलनाथ राज्यस्तर पर इंदिरा की यादों को ताजा करने में लगे हैं। कांग्रेस इंदिरा का जादू चलाने की कोशिश कर रही है।
 
योजनाओं का नाम बदल रही है सरकार
बीजेपी का कहना है कि नाम बदलने से योजना नहीं बदल जाएगी। बीजेपी ने दीनदयाल जी जैसे आम आदमी के नाम पर योजनाओं का नाम रखा जबकि कांग्रेस अब नाम बदलना चाहती है। कांग्रेस के सीमित सोच वाले व्यवहार से इस पुरानी पार्टी को वोट नहीं मिलेंगे।

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