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महिला दिवस पर कविता-बिना कुदरत की मर्जी के कयामत हो नहीं सकती,

बिना कुदरत की मर्जी के कयामत हो नहीं सकती,
जब तक रब न चाहेगा, हिफाजत हो नहीं सकती,
मैं उस देवी sकी, उस दुर्गा की, वह शक्ति स्वरूपा हूं,
कि जिस शक्ति के बिन सृष्टि सलामत हो नहीं सकती।
– वैशाली पाल

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